श्रीकृष्ण पर टिप्पणी को लेकर धीरेंद्र शास्त्री पर बरसे अखिलेश यादव, बोले— सनातन समाज की एकता तोड़ने की हो रही साजिश
भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र धारण किए वीडियो साझा कर फेसबुक पर जताई कड़ी नाराजगी, बोले— अवतारों की अपमानजनक तुलना करने के पीछे कौन है, इसकी हो गहन जांच

लखनऊ। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी का विवाद अब राजनीतिक रूप लेता नजर आ रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मामले में फेसबुक पर एक तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का हाथों में सुदर्शन चक्र धारण किए रणभूमि में खड़े स्वरूप का करीब 10 सेकंड का वीडियो साझा करते हुए कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई है।
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है कि कोई व्यक्ति राजनीतिक प्रश्रय प्राप्त कर सनातन समाज की एकता को तोड़ने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सनातनियों के बीच सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के पीछे कौन है और इसके पीछे कोई बाहरी शक्ति है या आंतरिक, इसकी गहन जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पूज्य अवतारों के बीच नकारात्मक भाव से जानबूझकर अपमानजनक तुलना की जा रही है। एक अवतार के मुकाबले दूसरे अवतार को श्रेष्ठ बताने की कोशिश सनातन समाज के विरुद्ध गहरी साजिश है। हर सच्चा सनातनी दोनों अवतारों का उपासक है और नवमी-अष्टमी का कोई भेद उसके मन में नहीं होता।
‘लोकरक्षक और लोकरंजक दोनों एक ही के अवतार’
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में कहा कि लोकरक्षक और लोकरंजक दोनों ही एक ही परम सत्ता के अवतार हैं। दोनों की लीलाएं अपने-अपने समय और परिस्थितियों के अनुरूप हुई हैं। ऐसे में उनके बीच गरिमाहीन तुलना करने का औचित्य क्या है और इसके पीछे क्या मंशा है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने टिप्पणी को लेकर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के निंदात्मक विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों में भी नाराजगी है। यदि ऐसी टिप्पणियों पर रोक नहीं लगाई गई तो समाज में अशांति, असंतोष और वैमनस्य का वातावरण बन सकता है। उन्होंने सर्वोच्च स्तर पर मामले का संज्ञान लेकर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।
मंदिरों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े मुद्दे भी उठाए
अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव ने देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा के अपमान, मणिकर्णिका घाट से जुड़े विवाद, मंदिरों को तोड़े जाने, शंकराचार्य पर कथित आरोपों और बटुकों पर प्रहार सहित जन्माष्टमी के आयोजन से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन घटनाओं को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इन सबके पीछे किसी सुनियोजित षड्यंत्र की आशंका की पड़ताल होनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी धर्म, मजहब, संप्रदाय, आराध्य या महापुरुष के प्रति अपमानजनक टिप्पणी और विष-वमन स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच कर सर्वोच्च स्तर पर संज्ञान लेते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
Author: Soron Live 24

