कासगंज कोतवाली में टेसू-झांझी के गीत लेकर पहुंचे नन्हे-मुन्ने बच्चे, कोतवाली प्रभारी को याद आया बचपन

कासगंज कोतवाली में टेसू-झांझी के गीत लेकर पहुंचे नन्हे-मुन्ने बच्चे, कोतवाली प्रभारी को याद आया बचपन

बच्चों के पारंपरिक गीतों और मासूम मुस्कान ने थाने का माहौल बनाया खुशनुमा, जगदीश चंद्र ने बच्चों के साथ साझा कीं बचपन की सुनहरी यादें

कासगंज। भारतीय लोक परंपराओं और बचपन की खूबसूरत यादों का अनूठा नजारा उस समय देखने को मिला, जब टेसू-झांझी लेकर नन्हे-मुन्ने बच्चे कासगंज कोतवाली पहुंचे। बच्चों ने कोतवाली प्रभारी जगदीश चंद्र को टेसू-झांझी के पारंपरिक गीत सुनाए। बच्चों की मासूमियत, उनकी प्यारी आवाज और खिलखिलाहट ने माहौल को आनंदमय बना दिया।

बच्चों को टेसू-झांझी के गीत गाते और इस पारंपरिक लोक उत्सव को मनाते देखकर कोतवाली प्रभारी जगदीश चंद्र को अपना बचपन याद आ गया। कुछ पल के लिए वह बचपन की सुनहरी यादों में खो गए। बच्चों के साथ बिताए इन खुशनुमा पलों ने उनके चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी।

कोतवाली प्रभारी जगदीश चंद्र ने बच्चों के इस प्रयास और उनकी मासूम अदाओं का आनंद लिया। उन्होंने भावपूर्ण अंदाज में बच्चों के साथ समय बिताया और बचपन की यादों को ताजा किया।

टेसू-झांझी उत्तर भारत की पारंपरिक लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे अवसर बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ पुरानी परंपराओं को जीवित रखने का संदेश भी देते हैं।

बच्चों की मासूम मुस्कान और पारंपरिक गीतों ने यह अहसास कराया कि बचपन जीवन का सबसे अनमोल दौर है, जिसकी यादें उम्र के किसी भी पड़ाव पर चेहरे पर मुस्कान ला देती हैं। ❤️🌸

Soron Live 24
Author: Soron Live 24

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