पापांकुशा एकादशी पर शूकरक्षेत्र में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने की पंचकोशीय परिक्रमा

पापांकुशा एकादशी पर शूकरक्षेत्र में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने की पंचकोशीय परिक्रमा

हरि की पौड़ी पर गंगा स्नान और भगवान वराह नारायण के पूजन के साथ हुआ शुभारंभ, भजन-कीर्तन व जयघोषों से गूंजा तीर्थनगरी का परिक्रमा मार्ग

सोरों (शूकर क्षेत्र), कासगंज। पापांकुशा एकादशी के पावन अवसर पर गुरुवार को तीर्थनगरी सोरों जी स्थित आदि तीर्थ शूकरक्षेत्र धाम में पंचकोशीय परिक्रमा श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुई। ब्राह्मण कल्याण सभा एवं शूकरक्षेत्र समाज सेवा समिति के संयुक्त संयोजन में आयोजित परिक्रमा में कासगंज सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए हजारों श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं, महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने सहभागिता की। भगवान श्रीहरि विष्णु के वराह अवतार के जयघोष, भजन-कीर्तन और संकीर्तन से पूरा तीर्थक्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

गुरुवार सुबह आठ बजे श्रद्धालुओं ने हरि की पौड़ी स्थित आदि गंगा में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। इसके बाद भगवान श्री वराह नारायण के मंदिर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन और दर्शन किए गए। भगवान के जयघोष के साथ पंचकोशीय परिक्रमा का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने मार्ग में पड़ने वाले प्राचीन मंदिरों, सिद्धपीठों और धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया तथा विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

एकादशी आत्मशुद्धि और भगवद्भक्ति का पर्व : शरद कुमार पाण्डेय

ब्राह्मण कल्याण सभा के संस्थापक अध्यक्ष एवं शूकरक्षेत्र समाज सेवा समिति के संयोजक शरद कुमार पाण्डेय ने पापांकुशा एकादशी के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म में एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु की उपासना, आत्मसंयम, जप, तप, दान और भक्ति का विशेष पर्व है। पद्म पुराण के उत्तरखंड में पापांकुशा एकादशी के महात्म्य का वर्णन मिलता है। इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा, व्रत, भगवन्नाम-स्मरण और सामर्थ्य के अनुसार दान करने की महिमा बताई गई है।

उन्होंने कहा कि एकादशी का उद्देश्य केवल व्रत रखना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि, इंद्रियों पर संयम, परोपकार तथा जीवमात्र के प्रति करुणा का भाव अपनाना भी है। भगवान की आराधना के साथ सेवा, दान और सत्कर्म को जीवन में उतारना ही इस पर्व की वास्तविक सार्थकता है।

शरद कुमार पाण्डेय ने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने वराह अवतार धारण कर रसातल में गई पृथ्वी का उद्धार किया था। इसी दिव्य स्वरूप की आराधना के कारण शूकरक्षेत्र धाम का विशेष धार्मिक महत्व है। हरि की पौड़ी, आदि गंगा के पावन तट और भगवान श्री वराह नारायण का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।

तीर्थ संरक्षण और परिक्रमा मार्ग के विकास पर दिया जोर

शरद कुमार पाण्डेय ने कहा कि शूकरक्षेत्र धाम की धार्मिक गरिमा के अनुरूप परिक्रमा मार्ग को गड्ढामुक्त और सुगम बनाना, श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना, स्वच्छता बनाए रखना तथा प्राचीन धार्मिक स्थलों का संरक्षण करना शासन-प्रशासन और समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रत्येक एकादशी पर आयोजित पंचकोशीय परिक्रमा में सहभागी बनने तथा तीर्थ की स्वच्छता और मर्यादा बनाए रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि पंचकोशीय परिक्रमा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक जागरण का भी माध्यम है। इसके जरिए नई पीढ़ी को शूकरक्षेत्र धाम की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और महात्म्य से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।

प्राचीन मंदिरों और सिद्धपीठों के दर्शन करते हुए पूरी हुई परिक्रमा

ब्राह्मण कल्याण सभा के संरक्षक सदस्य एवं शूकरक्षेत्र समाज सेवा समिति के सह-संयोजक शिवानंद उपाध्याय ने बताया कि परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न धार्मिक स्थलों पर दर्शन-पूजन किया। ढोल-मंजीरों, भजन-कीर्तन और भगवान श्रीहरि के जयघोषों से परिक्रमा मार्ग गुंजायमान रहा।

परिक्रमा हरि की पौड़ी स्थित भगवान श्री वराह मंदिर से प्रारंभ होकर वराह विश्राम घाट, वराह गौशाला, चक्रतीर्थ स्थित योगेश्वर महादेव मंदिर, सूर्यकुंड, दूधेश्वर महादेव मंदिर, सीताराम मंदिर, जया देवी भद्रकाली सिद्धपीठ, सतयुगकालीन गृद्धवट, आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित श्री यंत्र, ग्राम देवी मंदिर और गोस्वामी तुलसीदास जन्मस्थान मंदिर होते हुए 84 घंटे वाली मैया पहुंची।

इसके बाद श्रद्धालु सेड़ूनगरा होते हुए भगवान श्रीकृष्ण एवं बलदाऊ महाराज की क्रीड़ास्थली और वत्सासुर मोक्षस्थली बाछरू महाराज के दर्शन करने पहुंचे। वहां सत्यदेव तिवारी की ओर से प्रसादी का भोग लगाया गया और श्रद्धालुओं को फलाहार कराया गया। देव-दर्शन करते हुए परिक्रमा आगे सीता रसोई पहुंची।

जगह-जगह हुआ प्रसाद वितरण, श्रद्धालुओं का स्वागत

सीता रसोई में प्रत्येक एकादशी की भांति इस बार भी शिव शक्ति प्रॉपर्टीज के रामदर्शन महेरे, नीरज तिवारी और उनके सहयोगियों ने श्रद्धालुओं के विश्राम, केले और सेब के भोग तथा प्रसाद वितरण की व्यवस्था की। इसके बाद परिक्रमा ममता देवी भवन ‘प्रेम जी की बगीची’ पहुंची, जहां दीपक बड़गैयाँ, हनी, मनी पाराशर और उनके परिवार व सहयोगियों ने श्रद्धालुओं का स्वागत कर खीर का प्रसाद वितरित किया।

सिंग्नल वाले महाराज के स्थान पर गिरीश पाठक, अशोक धमनावत, विजय तिवारी और अन्य श्रद्धालुओं की ओर से प्रसाद वितरण एवं संकीर्तन का आयोजन किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भागीरथ गुफा, कपिल मुनि आश्रम, वनखंडेश्वर महादेव, करुआ देव महाराज और श्री चैतन्य महाप्रभु की बैठक के दर्शन किए। अंत में हरि की पौड़ी स्थित भगवान श्री वराह मंदिर पहुंचकर पंचकोशीय परिक्रमा पूर्ण हुई।

प्रदेश के कई जनपदों से पहुंचे श्रद्धालु

परिक्रमा में कासगंज, एटा, बरेली, बदायूं, उझानी, कछला और फर्रुखाबाद सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन में शरद कुमार पाण्डेय, शिवानंद उपाध्याय, अशोक कुमार पाण्डेय, शशांक दीक्षित, विनोद दीक्षित, प्रवीण कुमार द्विवेदी, सचिन गुप्ता, राजकुमार गौड़, जितेंद्र कुमार हल्दिया, दीपक गुप्ता, पवन कुमार महेश्वरी, अजय राठी, दिव्यांशु राठी, गिरिजाशंकर पाठक, प्रदीप उपाध्याय, अभय भारद्वाज, रमेश चंद्र टाइगर, रामू तिवारी, अथर्व, सौरभ दुबे, मुकेश रावत, सुमित दुबे, मोती सिंह, रामनिवास, उदयवीर, प्रवीण कुमार देव शर्मा, जगदीश तिवारी और दिनेश गुप्ता सहित दूर-दराज से आए अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।

श्रद्धालुओं की बढ़ती सहभागिता ने पंचकोशीय परिक्रमा की परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान की। आयोजन के माध्यम से शूकरक्षेत्र धाम की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सनातन परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

Soron Live 24
Author: Soron Live 24

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