रामलीला में राम वनगमन की मार्मिक लीला ने दर्शकों को किया भावुक

कैकेयी-मंथरा संवाद से लेकर निषादराज मिलन तक सजीव हुआ रामकथा का प्रसंग, वृंदावन की मंडली के शानदार मंचन ने जीता श्रद्धालुओं का दिल
कासगंज। 🚩 जय श्री राम 🚩 श्री रामलीला कमेटी (रजि.) कासगंज के तत्वावधान में आयोजित रामलीला मंचन में बुधवार की रात्रि भगवान श्रीराम के वनगमन की अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण लीला का मंचन किया गया। रात्रि आठ बजे शुरू हुए कार्यक्रम में कैकेयी और मंथरा के संवाद से लेकर राजा दशरथ एवं महारानी कैकेयी के बीच हुए संवाद तक रामकथा के महत्वपूर्ण प्रसंगों को कलाकारों ने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इसके बाद भगवान श्रीराम के वनगमन और निषादराज के साथ उनके मिलन की भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
वृंदावन से आई कलाकारों की मंडली ने अपने अभिनय, संवाद अदायगी और प्रभावशाली मंचन से रामकथा के प्रसंगों को इस तरह प्रस्तुत किया कि पूरा रामलीला परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
कैकेयी-मंथरा संवाद ने बदली रामकथा की दिशा
रामलीला मंचन की शुरुआत कैकेयी और मंथरा के संवाद से हुई। मंथरा द्वारा कैकेयी को राजा दशरथ से वरदान मांगने के लिए प्रेरित करने के प्रसंग को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद महारानी कैकेयी और राजा दशरथ के बीच हुए संवाद का मंचन किया गया। कैकेयी द्वारा अपने वरदानों की मांग और राजा दशरथ की व्याकुलता को कलाकारों ने भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से दर्शकों के सामने रखा।
इस प्रसंग ने रामकथा के उस महत्वपूर्ण मोड़ को जीवंत कर दिया, जहां राजमहल की परिस्थितियां भगवान श्रीराम के वनगमन का कारण बनती हैं। कलाकारों के संवाद और अभिनय ने दर्शकों को कथा के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
राम वनगमन की लीला देख भावुक हुए श्रद्धालु
कार्यक्रम का सबसे मार्मिक प्रसंग भगवान श्रीराम के वनगमन का रहा। पिता के वचन की मर्यादा रखने के लिए भगवान श्रीराम द्वारा वन जाने का निर्णय, परिवार से विदाई और अयोध्या से प्रस्थान की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया। कलाकारों ने इस प्रसंग को श्रद्धा, संवेदना और मर्यादा के साथ मंचित किया।
राम वनगमन की लीला ने दर्शकों को त्याग, कर्तव्यपालन, माता-पिता के प्रति सम्मान और वचन की मर्यादा जैसे आदर्शों का संदेश दिया। मंच पर प्रस्तुत इस प्रसंग के दौरान रामलीला परिसर में मौजूद श्रद्धालु पूरी तन्मयता से लीला का आनंद लेते नजर आए।
निषादराज और प्रभु श्रीराम का मिलन बना आकर्षण
वनगमन के बाद भगवान श्रीराम और निषादराज के मिलन का मंचन किया गया। इस प्रसंग में निषादराज की श्रद्धा, मित्रता, आत्मीयता और प्रभु श्रीराम के प्रति समर्पण को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से यह संदेश दिया कि सच्ची भक्ति और प्रेम में सामाजिक भेदभाव का कोई स्थान नहीं होता।
निषादराज और भगवान श्रीराम के बीच संवाद की सजीव प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। श्रद्धालुओं ने वृंदावन से आई मंडली के अभिनय और मंचन की मुक्त कंठ से सराहना की।
भावेश भारद्वाज के निर्देशन में हुआ मंचन
श्री रामलीला मंचन वृंदावन से आए भावेश भारद्वाज के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम में पुरोहित के रूप में पं. ओम प्रकाश पाठक एवं पं. भरत गौतम उपस्थित रहे। मंच संचालन नवीन सक्सेना ने किया। पूरी प्रस्तुति के दौरान धार्मिक आस्था और भक्ति का वातावरण बना रहा।
समिति पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने संभाली व्यवस्थाएं
कार्यक्रम के सफल आयोजन में श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष गोपाल मराठा, महामंत्री अरविंद वार्ष्णेय, कोषाध्यक्ष अमरीश वशिष्ठ, कार्यकारी अध्यक्ष अजय गुप्ता (डीसीएम), जय प्रकाश गुप्ता, प्रबंधक आकाश गोयल, कार्यकारी महामंत्री स्वयं माहेश्वरी, उपाध्यक्ष अनुज जौहरी एवं विनोद कुशवाहा, कार्यकारी कोषाध्यक्ष गौरव पाल, सह-कोषाध्यक्ष अंशुल गुप्ता, मंत्री संजय कुशवाहा, राहुल मिश्रा, सह महामंत्री आदित्य गुप्ता तथा स्टेज इंचार्ज रजनीश वार्ष्णेय सहित समिति के अनेक सदस्यों ने सहयोग किया।
इसके अतिरिक्त सच्चितानंद, विशु वार्ष्णेय, अजय भारद्वाज, आशु गुप्ता, गौरव गुप्ता, आकाश शर्मा, संस्कार बिड़ला, कृष्णा गुप्ता, गोपाल गुप्ता, भास्कर, अभिनव गौतम, शिवा सैनी, चंद्रवीर यादव, ऋषभ माहेश्वरी, कुश बिड़ला, अंश माहेश्वरी, शिवम अग्रवाल, विकल अग्रवाल, अजय अग्रवाल, प्रिंस वार्ष्णेय, उमंग सैनी, कुशाग्र मराठा, कुणाल साहू, अमन कुलश्रेष्ठ, राजेंद्र बिड़ला, इंद्रमोहन गुप्ता एवं भविष्य माहेश्वरी सहित समाजसेवियों और धर्मप्रेमियों ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई।
परिवार सहित रामलीला देखने पहुंचने की अपील
श्री रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने नगरवासियों एवं समस्त श्रद्धालुओं से परिवार सहित रामलीला मंचन में पहुंचने और भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेने की अपील की। समिति ने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और पारिवारिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
जय श्री राम! 🚩
Author: Soron Live 24

