नेपाल में तख्ता पलट के बाद बालेन शाह को लेकर अमेरिकी कनेक्शन के दावे से सियासी हलचल

नेपाल में बालेन शाह को लेकर अमेरिकी कनेक्शन के दावे से सियासी हलचल

को

द ग्रे जोन की रिपोर्ट में अमेरिकी कार्यक्रमों के जरिए नेपाली नेताओं को तैयार किए जाने का दावा, दस्तावेजों की व्याख्या पर उठे सवाल

काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र (बालेन) शाह को लेकर एक रिपोर्ट के बाद देश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। अमेरिकी वेबसाइट द ग्रे जोन ने लीक बताए जा रहे दस्तावेजों के आधार पर दावा किया है कि अमेरिका से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए नेपाल के कुछ युवा नेताओं को राजनीतिक रूप से तैयार किया गया और बाद में वे सत्ता के केंद्र तक पहुंचे।

रिपोर्ट में प्रधानमंत्री बालेन शाह के साथ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष रवि लामिछाने समेत कुछ अन्य नेताओं के नाम अमेरिकी वित्तपोषित कार्यक्रमों से जुड़े दस्तावेजों में होने का उल्लेख किया गया है। द ग्रे जोन ने इन गतिविधियों को नेपाल में सत्ता परिवर्तन की कथित अमेरिकी रणनीति से जोड़कर देखा है।

रिपोर्ट के अनुसार, CEPPS के ‘Niti Sambad’ कार्यक्रम के तहत युवा नेतृत्व और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए गतिविधियां संचालित की गई थीं। द ग्रे जोन ने दावा किया है कि वर्ष 2019 के कार्ययोजना दस्तावेज में बालेन शाह, रवि लामिछाने और कुछ अन्य नेताओं को ऐसे लोगों की सूची में शामिल किया गया था, जिन्हें समर्थन देने की योजना थी।

हालांकि, नेपाल के काठमांडू पोस्ट और अन्य नेपाली मीडिया रिपोर्टों ने इस दावे की व्याख्या पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, जिस ‘Niti Sambad’ कार्यक्रम का उल्लेख किया जा रहा है, वह सार्वजनिक रूप से दर्ज अमेरिकी सहायता कार्यक्रम था और दस्तावेजों में नेताओं के नाम होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि उन्हें अमेरिकी सरकार ने सत्ता में पहुंचाया।

इस पूरे विवाद के बीच नेपाल में हालिया बाढ़ और राहत-बचाव अभियान को लेकर भी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में सरकार की ओर से चलाए गए खोज, बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों की जानकारी दी थी।

फिलहाल बालेन शाह को अमेरिकी योजना के तहत प्रधानमंत्री बनाए जाने का दावा स्वतंत्र रूप से निर्णायक रूप से प्रमाणित नहीं हुआ है। उपलब्ध दस्तावेजों की अलग-अलग व्याख्या सामने आ रही है। ऐसे में इन आरोपों की वास्तविकता और दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर आगे स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Soron Live 24
Author: Soron Live 24

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *