सोरों से उठी मिलावटखोरी के खिलाफ आवाज, मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुंची शिकायत
“हम सब अपराधी हैं…?” शिवजी बैंदेल ने छेड़ी ‘शुद्ध आहार, स्वस्थ परिवार’ मुहिम, खाद्य पदार्थों की शुद्धता पर उठाए गंभीर सवाल

कासगंज यूपी। (सचिन उपाध्याय) मिलावटखोरी के खिलाफ सोरों से आवाज बुलंद होने लगी है। नगर निवासी शिवजी बैंदेल ने खाद्य पदार्थों में कथित मिलावट को लेकर आईजीआरएस/मुख्यमंत्री पोर्टल पर वर्तमान में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के स्क्रीनशॉट के अनुसार, दूध, दही, मिठाई, मसालों और देशी घी सहित कई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक दुकानदार या व्यापारी के खिलाफ नहीं, बल्कि मिलावटखोरी की प्रवृत्ति के खिलाफ है। उन्होंने लोगों से भी इस मुहिम में जुड़ने और मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है।
दूध से मिठाई और मसालों तक मिलावट के आरोप
मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायत में सोरों नगर में खाद्य पदार्थों में मिलावट चरम पर होने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में दूध के नाम पर कथित रूप से यूरिया युक्त सफेद पदार्थ बेचे जाने, मिठाइयों में घटिया सिंथेटिक मावा व स्टार्च की मिलावट तथा मिर्च-मसालों में लकड़ी का चूरा और खतरनाक रंग मिलाए जाने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
इसके अलावा शुद्ध देशी घी के नाम पर भी कथित मिलावटी घी बेचे जाने की बात शिकायत में कही गई है। इन आरोपों की वास्तविकता की पुष्टि हालांकि प्रयोगशाला जांच और सक्षम विभागीय कार्रवाई के बाद ही हो सकेगी।

डेयरियों और मिठाई की दुकानों पर छापेमारी की मांग
शिकायतकर्ता ने खाद्य सुरक्षा विभाग से सोरों नगर की डेयरियों, मिठाई की दुकानों और किराना स्टोरों पर तत्काल छापेमारी कर खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाने की मांग की है। साथ ही नमूनों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।
पहले की शिकायत का भी दिया हवाला
शिवजी बैंदेल ने अपनी पोस्ट में पूर्व में की गई शिकायत का भी उल्लेख किया है। उन्होंने शिकायत संख्या 40020226008834 का हवाला देते हुए कहा कि पहले शिकायत के बाद नमूने लिए गए थे, लेकिन कार्रवाई के परिणाम को लेकर वह संतुष्ट नहीं हैं।
अब उन्होंने दोबारा इस मुद्दे को मुख्यमंत्री पोर्टल के माध्यम से उठाया है। उनका कहना है कि खाद्य पदार्थों की जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जांच के परिणाम और कार्रवाई भी सामने आनी चाहिए।
सस्ती मिठाई खरीदने की मजबूरी या सेहत से समझौता?
शिवजी बैंदेल ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में हाल ही में सोरों बाजार में देखी एक घटना का जिक्र किया है। उनके अनुसार, एक दुकान पर कथित रूप से सिंथेटिक मावे से बनी मिठाई बेची जा रही थी। उनका दावा है कि वहां मौजूद ग्राहक को भी मिठाई की गुणवत्ता पर संदेह था, फिर भी वह सस्ती होने के कारण उसे खरीद रहा था।
इस घटना के माध्यम से उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या कुछ रुपये बचाने के लिए परिवार की सेहत से समझौता किया जा सकता है?
“हम सब अपराधी हैं…?”
शिवजी बैंदेल की पोस्ट का सबसे बड़ा सवाल समाज के सामने है—“हम सब अपराधी हैं…?”
उनका कहना है कि मिलावट करने वाला तो जिम्मेदार है ही, लेकिन यदि उपभोक्ता मिलावट जानते हुए भी केवल सस्ता होने के कारण सामान खरीदता है और बाकी लोग सब देखकर भी चुप रहते हैं, तो मिलावटखोरी पर अंकुश कैसे लगेगा?
उन्होंने लोगों से चुप रहने के बजाय जागरूक उपभोक्ता बनने की अपील की है।
दुकानदार से पूछें—“शुद्ध है तो लिखकर दोगे?”
मुहिम के तहत शिवजी बैंदेल ने उपभोक्ताओं से खाद्य पदार्थ खरीदते समय उसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल करने की अपील की है। उनका कहना है कि ग्राहक दुकानदार से स्पष्ट रूप से पूछें—
“भैया, ये शुद्ध है तो लिखकर दोगे?”
उनके अनुसार, उपभोक्ता जागरूक होंगे और गुणवत्ता को लेकर सवाल करेंगे तो मिलावटखोरी के खिलाफ दबाव बनेगा।
किसी दुकानदार के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई नहीं
शिवजी बैंदेल ने स्पष्ट किया है कि उनकी मुहिम किसी विशेष दुकानदार को बदनाम करने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि मिलावटखोरी से है।
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में शिकायत करते समय भी उन्होंने किसी दुकानदार का नाम सार्वजनिक नहीं किया। उनका उद्देश्य खाद्य पदार्थों की जांच कराना और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित कराना है।
“शुद्ध आहार, स्वस्थ परिवार” बनेगी मुहिम
शिवजी बैंदेल ने अपनी मुहिम को “शुद्ध आहार, स्वस्थ परिवार” नाम दिया है। उन्होंने लोगों से अभियान के समर्थन में आगे आने और पोस्ट को अधिक से अधिक साझा करने की अपील की है।
उनका कहना है कि जल्द ही समर्थकों के साथ बैठक कर अभियान की आगे की रणनीति तैयार की जाएगी और सोरों से शुरू होने वाली इस आवाज को पूरे देश तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत पहुंचने के बाद अब लोगों की निगाहें संबंधित विभाग की कार्रवाई पर हैं। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए नमूने लिए जाते हैं या नहीं, उनकी प्रयोगशाला जांच क्या परिणाम देती है और दोष साबित होने पर क्या कार्रवाई होती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
सवाल बड़ा है—मिलावट के खिलाफ सिर्फ शिकायत होगी या कार्रवाई भी दिखेगी?
सोरों में खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर उठी यह आवाज अब सरकारी पोर्टल तक पहुंच चुकी है। ऐसे में सवाल केवल मिलावटखोरी का नहीं, बल्कि जवाबदेही का भी है।
क्या सोरों से उठी “शुद्ध आहार, स्वस्थ परिवार” की आवाज वास्तव में जन अभियान बनेगी? क्या खाद्य सुरक्षा विभाग शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई करेगा? और क्या उपभोक्ता भी सस्ता सामान छोड़कर गुणवत्ता को प्राथमिकता देंगे?
फिलहाल सोरों की इस शिकायत ने बाजार से लेकर प्रशासन तक कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
Author: Soron Live 24

