बस स्टैंड पर अखबार ओढ़कर सोने वाला युवक बना कर्नाटक का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक
मुश्किल हालात से निकलकर राजाशेखर रगाती ने रचा सफलता का इतिहास, ग्रामीण बच्चों के लिए बनाई जिले की पहली सोशल साइंस लैब

बेलगावी। कभी बेंगलुरु के मैजेस्टिक बस स्टैंड पर अखबार ओढ़कर रात गुजारने वाले राजाशेखर रगाती ने अपनी मेहनत और लगन से ऐसा मुकाम हासिल किया, जहां आज उन्हें कर्नाटक के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों में गिना जाता है। वर्ष 2025-26 में उन्हें कर्नाटक राज्य स्तरीय सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
1981 में विजयपुरा जिले के हलसंगी गांव में जन्मे राजाशेखर ने विज्ञान कॉलेज की पढ़ाई छोड़ने के बाद करीब तीन वर्षों तक होटल, मेडिकल शॉप और हुबली की एक कैंटीन में काम किया। आर्थिक परिस्थितियां इतनी कठिन थीं कि उन्हें बेंगलुरु के मैजेस्टिक बस स्टैंड पर अखबार ओढ़कर रातें तक गुजारनी पड़ीं।
पिता की प्रेरणा से उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की। बीएड करने के बाद कई सरकारी परीक्षाओं में शामिल हुए। कुछ परीक्षाओं में वह महज एक-दो अंकों से पीछे रह गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वर्ष 2010 में सरकारी शिक्षक बनने के बाद उनके जीवन की दिशा बदल गई।
ग्रामीण बच्चों के लिए सोशल साइंस को आसान और रोचक बनाने के उद्देश्य से उन्होंने अपने स्कूल में बेलगावी जिले की पहली सोशल साइंस लैब स्थापित की। वर्ष 2022 में पुराने विद्यार्थियों के व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए एक हजार रुपये से शुरू हुई पहल में छात्रों, पूर्व छात्रों और समुदाय का सहयोग मिला और करीब 50 हजार रुपये जुटाकर लैब तैयार की गई।
इस पहल का असर स्कूल के परिणामों में भी दिखाई दिया। सोशल साइंस विषय में स्कूल का एसएसएलसी परिणाम लगातार 100 प्रतिशत रहा।
राजाशेखर ने यूट्यूब के माध्यम से भी विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक सामग्री साझा की। कोविड काल में उन्होंने डीएसईआरटी के लिए डिजिटल लर्निंग कंटेंट तैयार करने और सरकारी स्कूलों के लिए स्टूडेंट एक्टिविटी बुक्स बनाने में भी योगदान दिया।
उनके नवाचार, समर्पण और शिक्षण के नए तरीकों को देखते हुए उन्हें 2025-26 का कर्नाटक राज्य स्तरीय सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार दिया गया।
राजाशेखर की सोच है कि “एक शिक्षक को हमेशा विद्यार्थी बने रहना चाहिए।” यही सोच उन्हें लगातार सीखने और बच्चों को बेहतर तरीके से सिखाने के लिए प्रेरित करती है। उनका सफर बताता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, मेहनत, सीखने की ललक और दृढ़ संकल्प से सफलता हासिल की जा सकती है।
Author: Soron Live 24

