सोरों को मिले राष्ट्रीय साहित्यिक तीर्थ का दर्जा, वराह भक्ति स्तंभ व तुलसी शोध संस्थान की हो स्थापना
जन्माष्टमी पर प्रो. योगेंद्र मिश्र ने उठाई मांग, तीर्थ की परंपराओं को विकास के नाम पर प्रभावित न करने की अपील

कासगंज यूपी। (सचिन उपाध्याय)श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रोफेसर योगेंद्र मिश्र ने तीर्थ नगरी सोरों शूकरक्षेत्र के धार्मिक एवं साहित्यिक महत्व को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट के माध्यम से सरकार से सोरों के सनातन तीर्थत्व को सुरक्षित एवं संरक्षित रखने की अपील की।
प्रो. मिश्र ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मोर पंखधारी, बांसुरी वादक और त्रिभंगी स्वरूप में 16 कलाओं से पूर्ण ब्रह्म श्रीकृष्ण के प्राकट्योत्सव पर उनके संदेश को आत्मसात करने और उनके खिलंदड़ापन को जीवन में उतारने का प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने सरकार और पर्यटन विभाग से आग्रह किया कि विकास और पर्यटन के नाम पर तीर्थयात्रियों की आस्था, श्रद्धा और निष्ठा प्रभावित न हो। पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म आदि की प्राचीन एवं अक्षुण्ण परंपराओं को व्यवस्था के नाम पर परिवर्तित अथवा डायवर्ट नहीं किया जाना चाहिए।
प्रो. मिश्र ने कहा कि एक सप्ताह बाद शूकरक्षेत्र सोरों में भगवान श्रीवराह के प्राकट्योत्सव का महापर्व आने वाला है। जनभावना के अनुरूप उन्होंने सोरों में ‘वराह भक्ति स्तंभ’ के निर्माण तथा तुलसी शोध संस्थान एवं श्रीरामलीला अकादमी की स्थापना की मांग की है।
उन्होंने कहा कि शूकरक्षेत्र सोरों भगवान श्रीवराह एवं गोस्वामी तुलसीदास की लीला, जन्म, क्रीड़ा और विद्या भूमि के रूप में धार्मिक एवं साहित्यिक दृष्टि से विशिष्ट महत्व रखता है। अनेक महाकवियों से जुड़ी इस भूमि को राष्ट्रीय साहित्यिक तीर्थ का दर्जा दिया जाना उचित होगा।
उन्होंने सरकार से अपील की कि सोरों की धार्मिक, पौराणिक और साहित्यिक पहचान को संरक्षित रखते हुए यहां की प्राचीन परंपराओं और तीर्थ स्वरूप को प्राथमिकता दी जाए।
Author: Soron Live 24

