हिम्मतगढ़ में सात दिवसीय दिव्य सत्संग का समापन, शूकरक्षेत्र सोरों और भगवान वराह की महिमा का किया गुणगान
गंगा गुरु विक्रम पांडेय ने श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा, गौसेवा और सदाचार अपनाने का दिया संदेश

झालावाड़। ग्राम हिम्मतगढ़, तहसील रायपुर, जिला झालावाड़ में दांगी धर्मशाला में आयोजित सात दिवसीय दिव्य सत्संग का श्रद्धापूर्वक समापन हुआ। सत्संग में शूकरक्षेत्र सोरों गंगाजी, कासगंज उत्तर प्रदेश से पधारे गंगा मैया के भक्त एवं गंगा गुरु विक्रम पांडेय के सान्निध्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रवचन सुने।
सात दिनों तक चले सत्संग में गुरुजी विक्रम पांडेय ने श्रद्धालुओं को जीवन को सार्थक बनाने, आत्मा के उद्धार तथा परमात्मा से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने धर्म, सेवा, गौसेवा और सदाचार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक एवं धार्मिक जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया।
सत्संग के दौरान शूकरक्षेत्र सोरों गंगाजी तीर्थ की महिमा और भगवान वराह के अवतार का विस्तार से वर्णन किया गया। गुरुजी ने बताया कि शूकरक्षेत्र सोरों जी की धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपरा अत्यंत प्राचीन है। उन्होंने भगवान वराह और पृथ्वी के संवाद से जुड़े धार्मिक प्रसंगों का वर्णन करते हुए तीर्थ की महिमा श्रद्धालुओं के समक्ष रखी।
उन्होंने संत महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मभूमि शूकरक्षेत्र सोरों जी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का भी उल्लेख किया। साथ ही ‘गर्भ गीता’ के उपदेशों के माध्यम से आत्मा के उद्धार और परमात्मा से जुड़ने के मार्ग को सरल शब्दों में समझाया।
गुरुजी ने कहा कि सत्संग का उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि जीवन में उसके संदेश को उतारना है। उन्होंने माता-बहनों एवं धर्मप्रेमी बंधु-भगिनियों से धर्म, सेवा, गौसेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने तथा परमात्मा से जुड़ने का आह्वान किया।
सात दिवसीय सत्संग का आयोजन ग्रामवासियों एवं धर्मप्रेमी बंधु-भगिनियों के सहयोग से किया गया। सत्संग की विशेषता यह रही कि गुरुजी की ओर से इसका आयोजन पूर्ण रूप से निःशुल्क किया गया। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने सत्संग के आयोजन के लिए आयोजकों एवं गुरुजी का आभार व्यक्त किया।
Author: Soron Live 24

