आस्था की अनोखी तस्वीर: आगरा के रैहलई से माता-पिता को ठेला नुमा कांवड़ में बैठाकर पहुंचे सोरों, लहरा गंगा स्नान कराकर साथ ले गए

कलयुग के श्रवण कुमार बने चार भाई, माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर लाए गंगाजल

आस्था की अनोखी तस्वीर: आगरा के रैहलई से माता-पिता को ठेला नुमा कांवड़ में बैठाकर पहुंचे सोरों, गंगा स्नान कराकर साथ ले गए

सोरों, कासगंज। (सचिन उपाध्याय)तीर्थ नगरी सोरों शूकर क्षेत्र में चल रहे कांवड़ मेले में बुधवार शाम आस्था, संस्कार और माता-पिता की सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। आगरा जनपद के रैहलई गांव निवासी चार भाई अपने माता-पिता को ठेला नुमा कांवड़ में बैठाकर सोरों के लहरा गंगा घाट पहुंचे। यहां चारों भाइयों ने माता-पिता को गंगा स्नान कराया और विधि-विधान से गंगाजल भरकर उन्हें कांवड़ में बैठाया। इसके बाद चारों भाई अपने माता-पिता को साथ लेकर गांव के लिए रवाना हो गए।

माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर गंगाजल लेने पहुंचे चारों भाइयों को देखकर घाट पर मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे। इस अनोखे दृश्य को देखकर हर कोई भाइयों की सेवा और समर्पण की प्रशंसा करता नजर आया। लोगों ने चारों भाइयों को ‘कलयुग के श्रवण कुमार’ बताते हुए कहा कि माता-पिता को भगवान शिव और माता पार्वती के समान मानकर उनकी सेवा करना भारतीय संस्कारों की सुंदर मिसाल है।

बताया गया कि भगवान सिंह और गुड्डी देवी के चार पुत्र कान्हा, सचिन, शिवम और मोहित अपने माता-पिता को साथ लेकर सोरों पहुंचे थे। गंगा स्नान और जल भरने के बाद वे माता-पिता को उसी कांवड़ में बैठाकर अपने गांव रैहलई, जनपद आगरा के लिए रवाना हुए।

कांवड़ मेले में डाक कांवड़, कलश कांवड़ और सामान्य कांवड़ के साथ आस्था के विभिन्न रूप देखने को मिल रहे हैं, लेकिन माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर गंगाजल लेने पहुंचे इन चार भाइयों की तस्वीर ने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। यह दृश्य जहां श्रद्धा से जुड़ा था, वहीं माता-पिता की सेवा और भारतीय संस्कारों का संदेश भी दे रहा था।

Soron Live 24
Author: Soron Live 24

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