कामिका एकादशी पर सोरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने की पंचकोशीय परिक्रमा
“बूढ़ी गंगा को पुनर्जीवित करो” के साथ गूंजा “ॐ जय गंगे, ॐ जय वराह” का जयघोष, धर्म के साथ तीर्थ संरक्षण का संदेश

सोरों, 09 अगस्त। कामिका एकादशी के पावन अवसर पर रविवार को आदि तीर्थ श्री शूकरक्षेत्र धाम सोरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ब्राह्मण कल्याण सभा एवं शूकरक्षेत्र समाज सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित पंचकोशीय परिक्रमा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भगवान श्री वराह और मां गंगा के जयघोष से पूरा शूकरक्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
सुबह से ही हरि की पैड़ी, भगवान श्री वराह मंदिर और आसपास के तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। श्रद्धालुओं ने बूढ़ी गंगा के तट पर स्नान-पूजन कर भगवान श्री वराह की आराधना की। इसके बाद सुबह सात बजे हरि की पैड़ी से पंचकोशीय परिक्रमा का शुभारंभ हुआ।
परिक्रमा संयोजक शरद कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में निकले श्रद्धालुओं के कारवां में साधु-संतों के साथ महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे भी शामिल रहे। “ॐ जय गंगे, ॐ जय वराह”, “जय श्री वराह” और “ॐ नमो नारायण भगवते वासुदेवाय” के जयघोष से परिक्रमा मार्ग गूंजता रहा।
इन प्रमुख तीर्थ स्थलों से होकर गुजरी परिक्रमा
पंचकोशीय परिक्रमा भगवान श्री वराह मंदिर से शुरू होकर वराह विश्राम घाट, वराह गौशाला, चक्रतीर्थ स्थित योगेश्वर महादेव मंदिर, सूर्यकुंड, दूधेश्वर महादेव मंदिर, सीताराम मंदिर, जया देवी भद्रकाली सिद्धपीठ, गृद्धवट, श्री यंत्र, ग्राम देवी मंदिर और गोस्वामी तुलसीदास जन्मस्थान मंदिर होते हुए 84 घंटे वाली मैया पहुंची।
इसके बाद श्रद्धालु सेड़ूनगरा, बाछरू महाराज, सीता रसोई, प्रेम जी की बगीची, सिग्नल वाले महाराज, भागीरथ गुफा, कपिल मुनि आश्रम, वनखंडेश्वर महादेव, करुआ देव महाराज और श्री चैतन्य महाप्रभु की बैठक के दर्शन करते हुए पुनः हरि की पैड़ी स्थित भगवान श्री वराह मंदिर पहुंचे और परिक्रमा पूर्ण की।
जगह-जगह हुआ श्रद्धालुओं का स्वागत
परिक्रमा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद, विश्राम और जल आदि की व्यवस्था की गई। सीता रसोई में शिव शक्ति प्रॉपर्टीज के रामदर्शन महेरे, नीरज तिवारी एवं सहयोगियों ने सेवा की। प्रेम जी की बगीची में दीपक बड़गैयाँ एवं उनके परिवार ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। सिग्नल वाले महाराज पर अशोक धमनावत, विजय तिवारी, अवधेश तिवारी सहित सहयोगियों ने प्रसाद वितरण एवं संकीर्तन कराया।
बूढ़ी गंगा के पुनर्जीवन की उठी आवाज
इस बार की पंचकोशीय परिक्रमा में धार्मिक आस्था के साथ तीर्थ संरक्षण का संदेश भी प्रमुख रहा। श्रद्धालुओं और आयोजकों ने आदि गंगा बूढ़ी गंगा के पुनर्जीवन की मांग उठाई।
परिक्रमा संयोजक शरद कुमार पाण्डेय ने कहा कि शूकरक्षेत्र केवल मंदिरों का समूह नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की प्राचीन धरोहर है। उन्होंने कहा कि बूढ़ी गंगा की दुर्दशा केवल जलधारा की समस्या नहीं, बल्कि शूकरक्षेत्र की सभ्यता, संस्कृति और प्राचीन तीर्थ परंपरा से जुड़ा विषय है।
उन्होंने शासन-प्रशासन से बूढ़ी गंगा के पुनर्जीवन के लिए वैज्ञानिक एवं स्थायी कार्ययोजना बनाने तथा पंचकोशीय परिक्रमा मार्ग और प्राचीन तीर्थ स्थलों के संरक्षण की मांग की।
आस्था के साथ संरक्षण का संकल्प
आयोजकों ने कहा कि तीर्थ विकास केवल सड़क और भवन बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। शूकरक्षेत्र की प्राचीन जलधाराओं, धार्मिक परंपराओं, पौराणिक स्थलों और प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना भी तीर्थ विकास का अहम हिस्सा है।
कामिका एकादशी पर हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शूकरक्षेत्र सोरों की धार्मिक आस्था आज भी उतनी ही जीवंत है।
Author: Soron Live 24

