‘लावनी गीत’ संग्रह में सजी लोककाव्य की अनमोल धरोहर, वरिष्ठ कवि रणधीर प्रसाद गौड़ की रचनाधर्मिता को मिली सराहना
समीक्षक उमेश पाठक ने कहा— विलुप्त होती लावनी परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास, पुस्तक में 72 लावनी गीतों का संग्रह।

सोरों/कासगंज। वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि रणधीर प्रसाद गौड़ (बरेली) द्वारा रचित ‘लावनी गीत’ काव्य संग्रह को लोक साहित्य और भारतीय काव्य परंपरा की महत्वपूर्ण कृति बताया गया है। साहित्यकार उमेश पाठक (सोरों शूकरक्षेत्र, कासगंज) ने पुस्तक की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि यह संग्रह केवल काव्य नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति, अध्यात्म और पारंपरिक लावनी गायन शैली का जीवंत दस्तावेज है।
समीक्षा के अनुसार पुस्तक में 72 लावनी गीत संकलित हैं, जिनमें जीवन दर्शन, आध्यात्मिक चिंतन, भक्ति, लोकसंस्कृति और मानवीय मूल्यों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। समीक्षक ने कहा कि आधुनिक समय में जब पारंपरिक काव्य विधाएं धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं, ऐसे समय में इस कृति का प्रकाशन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
समीक्षा में लावनी छंद, ख्याल, दंगल गायन, कलंगी-तुर्रा परंपरा तथा विभिन्न अलंकारों और छंदों का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। साथ ही कवि रणधीर प्रसाद गौड़ की भाषा, शिल्प, अनुप्रास, दर्शन और काव्य प्रतिभा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की गई है।
उमेश पाठक ने साहित्य प्रेमियों और यूट्यूब सहित विभिन्न मंचों से जुड़े काव्य रसिकों से इस कृति को अधिक से अधिक प्रचारित करने का आह्वान करते हुए कहा कि ‘लावनी गीत’ भारतीय लोक साहित्य को नई पहचान देने वाली महत्वपूर्ण पुस्तक सिद्ध होगी।
Author: Soron Live 24

