थाने से अदालत तक… 20 साल बाद अपने धाम लौटे वनखंडेश्वर महादेव, जानिए जमानत पर रिहाई की अनोखी कहानी
आठ लाख रुपये की जमानत, छह साल की कानूनी लड़ाई और फिर हुई प्राण-प्रतिष्ठा; सोरों के वनखंडेश्वर महादेव मंदिर का अनोखा इतिहास

कासगंज उत्तर प्रदेश। तीर्थनगरी सोरों के प्राचीन मंदिरों में आस्था और इतिहास की अनेक अद्भुत गाथाएं समाई हुई हैं। इन्हीं में से एक है पंचकोसी परिक्रमा मार्ग स्थित भागीरथी गुफा के सामने वनखंडेश्वर महादेव मंदिर, जहां विराजमान शिवलिंग से जुड़ी ऐसी घटना सामने आती है, जिसे सुनकर हर कोई आश्चर्यचकित रह जाता है। यह शायद देश का इकलौता ऐसा मामला है, जिसमें भगवान शिव के शिवलिंग को अदालत के आदेश पर जमानत देकर पुलिस से छुड़ाया गया और फिर पूरे विधि-विधान के साथ मंदिर में पुनः स्थापित किया गया।
मंदिर के पुजारी श्यामपुरी बताते हैं कि वनखंडेश्वर महादेव मंदिर सदियों पुराना है और इसका संबंध राजा भागीरथ के समय से माना जाता है। लगभग पांच फीट ऊंचे इस दुर्लभ शिवलिंग पर भगवान शिव के मुख की अद्भुत आकृति उकेरी हुई है, जो इसे और भी विशेष बनाती है।
1973 में चोरी हुआ था दुर्लभ शिवलिंग
करीब 26 मार्च 1973 को चोर इस प्राचीन शिवलिंग को उखाड़कर अलीगढ़ ले गए। घटना के बाद सोरोंजी कोतवाली में चोरी का मुकदमा दर्ज कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिवलिंग की दिव्यता से अनजान चोरों पर कुछ ही समय बाद विपत्तियां टूटने लगीं। कई लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गए और कुछ की असमय मृत्यु भी हो गई। भयभीत चोरों ने आखिरकार शिवलिंग को अलीगढ़ के पाली मुकीमपुर थाने की पुलिस के हवाले कर दिया।
थाने में ही होने लगी पूजा-अर्चना
22 मई 1993 को पुलिस ने अपराध संख्या 59/1993 के तहत शिवलिंग को थाने में स्थापित कर उसकी नियमित पूजा-अर्चना शुरू करा दी। करीब दो साल बाद सोरों के ग्रामीणों को पता चला कि उनका प्राचीन शिवलिंग थाने में सुरक्षित रखा गया है। जब ग्रामीण उसे लेने पहुंचे तो पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक शिवलिंग सौंपने से इनकार कर दिया।
छह साल तक चली अदालत की लड़ाई
इसके बाद ग्रामीणों ने अलीगढ़ दीवानी न्यायालय में अपना दावा प्रस्तुत किया। करीब छह वर्षों तक चले मुकदमे के बाद अदालत ने ग्रामीणों के पक्ष में फैसला सुनाया और शिवलिंग को सुपुर्द करने के लिए आठ लाख रुपये की जमानत तय की।
होडलपुर निवासी सुभाष चंद्र शर्मा, फरीदपुर के पुजारी श्यामपुरी, उसरांव बघेल और वासुदेव सहित ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से जमानत राशि जुटाकर अदालत में जमा की। इसके बाद वनखंडेश्वर महादेव को पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ वापस मंदिर लाया गया और प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई।
आज भी सावन के महीने में यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस ऐतिहासिक कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले उसरांव बघेल और वासुदेव अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वनखंडेश्वर महादेव की वापसी में उनका योगदान आज भी श्रद्धापूर्वक याद किया जाता है।
क्या कहते हैं ग्रामीण
पवन उपाध्याय ने बताया, “शिवलिंग चोरी का मामला सोरोंजी कोतवाली और पाली मुकीमपुर थाने में दर्ज हुआ था। ग्रामीणों ने अलीगढ़ दीवानी अदालत में अपना दावा पेश किया। लगभग छह साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अदालत के आदेश पर जमानत देकर वनखंडेश्वर महादेव का शिवलिंग वापस मंदिर लाया गया।”
सुभाष चंद्र शर्मा (जमानतदार) ने कहा, “कोर्ट में लंबी भागदौड़ और गांव वालों के सहयोग से हम वनखंडेश्वर महादेव का शिवलिंग वापस ला सके। यह सब महादेव की कृपा से ही संभव हो पाया।”
Author: Soron Live 24

