प्रख्यात साहित्यकार डॉ. ब्रजेन्द्र कुमार सिंघल को ‘ठाकुरदास खुजनेरी राष्ट्रीय अध्यात्म सम्मान–2026’ से किया गया सम्मानित
भोपाल में आयोजित 53 वें वार्षिकोत्सव सह साहित्योत्सव में मिला राष्ट्रीय सम्मान, शिक्षा, अध्यात्म और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान का हुआ सम्मान

तीर्थ नगरी सोरों यूपी (सचिन उपाध्याय)।प्रख्यात साहित्यकार, शोधकर्ता एवं वरिष्ठ संपादक डॉ. ब्रजेन्द्र कुमार सिंघल (जयपुर, राजस्थान) को शिक्षा, अध्यात्म एवं साहित्य के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन और उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘ठाकुरदास खुजनेरी राष्ट्रीय अध्यात्म सम्मान–2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भोपाल में आयोजित 53 वें वार्षिकोत्सव सह साहित्योत्सव के दौरान प्रदान किया गया।
आयोजकों द्वारा जारी सम्मान-पत्र के अनुसार डॉ. सिंघल की अब तक 120 से अधिक कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं तथा उन्होंने राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में भी सक्रिय भागीदारी कर भारतीय साहित्य एवं संस्कृति को नई पहचान दिलाई है। उनके उत्कृष्ट साहित्यिक एवं आध्यात्मिक योगदान को देखते हुए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।
डॉ. ब्रजेन्द्र कुमार सिंघल पिछले 44 वर्षों से ‘रामस्नेही संदेश’ त्रैमासिक पत्रिका का संपादन एवं प्रकाशन कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे ‘रामस्नेही भास्कर’ मासिक पत्रिका के भी कई वर्षों तक प्रधान संपादक रहे हैं। उनके 300 से अधिक शोधपरक एवं साहित्यिक लेख देश की अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
उन्होंने अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में अध्यक्षता एवं व्याख्यान दिए हैं। कई प्रतिष्ठित लेखकों की पुस्तकों की समीक्षाएँ एवं भूमिकाएँ भी लिखी हैं। डॉ. सिंघल को राजस्थानी, ब्रज, गुजराती, पंजाबी, संस्कृत एवं अंग्रेज़ी भाषाओं का अच्छा ज्ञान है, जबकि कन्नड़ एवं सिंधी भाषा का भी कार्यचलाऊ ज्ञान रखते हैं।
साहित्य के साथ-साथ वे अनेक धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं में ट्रस्टी एवं पदाधिकारी के रूप में भी सक्रिय हैं। प्राच्यविद्या, पुरालेख, हस्तलेख, शिलालेख, पुरातत्व तथा ऐतिहासिक दस्तावेजों के अध्ययन एवं पठन में उनकी विशेष विशेषज्ञता मानी जाती है।
अपने लंबे साहित्यिक जीवन में डॉ. ब्रजेन्द्र कुमार सिंघल को देश की विभिन्न संस्थाओं द्वारा अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म के क्षेत्र में उनका योगदान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत माना जाता है। तीर्थनगरी सोरों शूकर क्षेत्र में प्रख्यात साहित्यकार उमेश पाठक ने हर्ष व्यक्त किया एवं शुभ कामनाएं दी।
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Author: Soron Live 24

