आपातकाल 51 वीं बरसी रोंगटे खड़े करती है इमरजेंसी की यादें-इस्लाम अहमद फारूकी

आपातकाल 51 वीं बरसी रोंगटे खड़े करती है इमरजेंसी की यादें-इस्लाम अहमद फारूकी

एटा की अदालत में मुझे छः माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

 

कासगंज।आपातकाल आज़ादी की दूसरी लड़ाई के 51 साल ( 26 जून 1975 लागू तथा 21 मार्च 1977 समापन )24 जून 1975 को प्रसिद्ध सैनानी एवं लोकतंत्र के प्रेरणा श्रोत लोकनायक श्री जय प्रकाश नारायण जी ने दिल्ली में विशाल रेली कर प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी से स्तीफे की माँग की और जनता से आव्हान किया कि उठो और अपनी सत्ता खुद सभालो । “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” के गगन वेदी नारों से गूँज उठी और अंधी राज सत्ता का दिल दहल उठा लोकतंत्र में जनता नहीं आयेगी तो फिर कौन आयेगा? लोक नायक जय प्रकाश नारायण जी द्वारा आम जनता का आव्हान करना श्रीमती इन्दिरा गाँधी को अखर गया। इतिहास में सभी तानाशाहों को पीछे धकेलते हुये 25-26 जून 1975 की मध्य रात्रि में तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद खाँ के बिना उनकी इच्छा के जबरन हस्ताक्षर कराकर सम्पूर्ण भारत में आपातकाल लागू कर दिया। लोक नायक जय प्रकाश नारायण जी को रात में ही गिरफ्तार करके अज्ञात स्थान ले जाया गया। कासगंज जनपद के कस्बा सहावर निवासी डॉ इस्लाम अहमद फारूकी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लोकतंत्र सैनानी कल्याण परिषद ने बताया 25/26 जून को आपातकाल की घोषणा कर दी थी जिससे पूरा भारत वर्ष जेल खाना बना दिया गया था। जेलो में जगह नहीं थी बरसात का मौसम था फिर भी सरकारी डाक बंगलों को ही जेल खाने में तब्दील कर दिया गया था। लोकतंत्र की पूरी तरह हत्या कर पूरे देश में पुलिस राज व तानाशाही का नंगा नाच हो रहा था। 07 जुलाई 1975 को मुझे सहावर थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर एटा जिला जेल में भेज दिया आरोप था कि मैं एक भीड़ को अपने सम्बोधन में कह रहा था कि वेलगाम तानाशाह प्रधानमंत्री का तखता पलट दो और लोकतंत्र बचा लो 30/05/1976 को एटा की अदालत में मुझे छः माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इन आपातकाल राज नैतिक बंदियों के महा संग्राम से देश में लोकतंत्र की बहाली हुयी तथा भारत वर्ष की राजनीति को कांग्रेस मुक्त करने में इन सेनानियों “आपतकाल बंदी राजनेताओं का ” बहुत बड़ा योगदान रहा है। आखिर थक हार कर इन्दिरा कांग्रेस सरकार ने 18 जनवरी 1977 को आम चुनावों की घोषणा कर दी 16 मार्च को मतदान हुआ 20 मार्च को परिणाम आये कांग्रेस बुरी तरह हारी जनता पार्टी जीत गयी 19 मार्च 1977 को प्रधानमंत्री पद से स्तीफा देने से पहले श्रीमति इन्दिरा गाँधी ने आपातकाल हटाने की घोषणा कर दी थी।
लखनऊ में 26 जून 2006 में रविन्द्रालय सभागार चार बाग लखनऊ में 29 वर्षों के बाद उ०प्र० के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री मुलायम सिंह यादव ने ऐसा कदम उठाने का साहस किया कि बिना किसी पार्टी भेदभाव के सभी राजनैतिक दलों के आपातकाल बंदियों को लोकतंत्र सैनानी सम्मान देकर प्रतीक स्वरूप 500 रू० प्रतिमाह भत्ता ( मानदेय ) उ०प्र० परिवहन निगम की सारी बसों में एक सहवर्ती के साथ निशुल्क यात्रा प्रदेश के राष्ट्रीय अस्पतालों में स्वास्थ्य लाभ, तथा उनका अन्तिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ एवं उनके स्वर्गवास के बाद उनके पति अथवा पत्नी को उपरोक्त यथावत मिलेगा।
सन् 2007 में सुश्री मायावती ने यह सब सुविधांयें बन्द कर दी जबकि इसी लोकतंत्र की वहाली के कारण ही एक दलित की बेटी मुख्यमंत्री बनी थी सन् 2012 में पुनः समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह के पुत्र श्री अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद वैधानिक तौर पर रू० 15000 मानदेय तथा अन्य सुविधायें लोकतंत्र सैनानी सम्मान विधेयक, 2016 अधिनियम बन गया। फिलहाल सभी लोकतंत्र सेनानियों को रू० 20000 मानदेय उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिया जा रहा है।
आपातकाल की सजा काट चुके 13 लोग अब जनपद कासगंज में रह गए हैं जिसमें 4 लोगों की मृत्यु के बाद उनके आश्रित मानदेय पा रहे हैं।लोकतंत्र सैनानियों का सम्मान समय की आवश्यकता है। इनको सम्मानित करके स्वयं लोकतंत्र ही सम्मानित होगा। केन्द्रीय सरकार द्वारा लोकतंत्र सैनानियों को सम्मानित करने से देश में लोकतंत्र की जड़ें और अधिक मजबूत होगी और कभी कोई कूर जालिम शासक देश में लोकतंत्र को समाप्त कर तानाशाही या राजतंत्र लाने का सपना नहीं देख पायेगा। सैनानियों का सम्मान जो “केन्द्र का कर्तव्य है” जिससे आने वाली पीढ़ियों संघर्ष के लिये उत्प्रेरित होंगी।

फोटो।लोकतंत्र सैनानी डॉ इस्लाम अहमद फारूकी
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Soron Live 24
Author: Soron Live 24

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