तीर्थ नगरी सोरों में श्रद्धालुओं को नहीं मिल रहीं मूलभूत सुविधाएं
मोमबत्ती की रोशनी में खाना बनाने को मजबूर यात्री, नगर पालिका की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

सोरों।( सचिन उपाध्याय/ रवि श्रोतीय)उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के विकास और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कई बार तीर्थ स्थलों को धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने की बात कही है। इसके बावजूद तीर्थ नगरी सोरों शूकर क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
मध्य प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु अपने परिजनों की अस्थि विसर्जन एवं धार्मिक अनुष्ठानों के लिए तीर्थ नगरी पहुंचते हैं। वहीं मई-जून में चारधाम यात्रा शुरू होने के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोरों में भगवान वराह के दर्शन कर आगे की यात्रा पर निकलते हैं। लेकिन तीर्थ नगरी में श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन और प्रकाश जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं का अभाव लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
मेला मैदान स्थित पांच महाशक्ति के पीछे नगर पालिका द्वारा बनाए गए सार्वजनिक बरामदे में श्रद्धालु अंधेरे में मोमबत्ती जलाकर खाना बनाने और भोजन करने को मजबूर दिखाई दिए। बिजली और पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मध्य प्रदेश से आए श्रद्धालु श्याम दास ने बताया कि तीर्थ नगरी में आस्था के साथ लोग दूर-दूर से आते हैं, लेकिन यहां ठहरने और भोजन बनाने जैसी बुनियादी सुविधाएं भी ठीक से नहीं मिल पा रहीं। उन्होंने कहा कि रात में अंधेरे के बीच भोजन बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
श्रद्धालु कालीचरण ने कहा कि सरकार तीर्थ स्थलों के विकास की बात करती है, लेकिन सोरों में व्यवस्थाएं बेहद कमजोर नजर आ रही हैं। यदि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें तो यहां आने वालों की संख्या और बढ़ सकती है।
यात्री महेंद् ने बताया कि मेला मैदान में साफ-सफाई, प्रकाश और पेयजल जैसी व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है। उन्होंने नगर पालिका प्रशासन से जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने की मांग की।
वहीं स्थानीय लोगों ने नगर पालिका प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि तीर्थ नगरी में श्रद्धालुओं की सुविधा के नाम पर व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। स्थानीय नागरिकों ने नगर की धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं से भी आगे आकर श्रद्धालुओं के लिए भोजन, प्रकाश और ठहरने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपील की है, ताकि तीर्थ के प्रति आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास बना रहे।
Author: Soron Live 24

