सुप्रीम कोर्ट को भेजा गया पुनर्विचार प्रार्थना पत्र एनसीईआरटी की किताब से ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय हटाने पर उठाए सवाल





कासगंज, 20 अप्रैल 2026।यूपी के जनपद कासगंज के सोरों निवासी लेखक अशोक कुमार पाण्डेय ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक प्रार्थना पत्र भेजकर एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय हटाने के निर्देश पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने इस विषय पर कई महत्वपूर्ण और विचारणीय बिंदु प्रस्तुत करते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।
🔹 लोकतंत्र में न्यायपालिका का सर्वोच्च स्थान
पत्र में लेखक ने न्यायपालिका को लोकतंत्र का “मस्तिष्क” बताते हुए उसकी गरिमा और महत्व को सर्वोपरि बताया है। उनका कहना है कि न्यायपालिका की तुलना अन्य अंगों से करना उचित नहीं है।
🔹 पारदर्शिता और जागरूकता पर जोर
उन्होंने लिखा कि शिक्षा का उद्देश्य किसी संस्था को बदनाम करना नहीं, बल्कि उसमें पारदर्शिता और सुधार लाना है। छात्रों को वास्तविकताओं से अवगत कराना उन्हें जागरूक नागरिक बनाता है।
🔹 सुधार के लिए जरूरी है सच्चाई का सामना
लेखक के अनुसार भ्रष्टाचार एक सामाजिक बुराई है, जिससे किसी भी संस्था अछूती नहीं है। यदि विद्यार्थी कमियों को समझेंगे, तभी भविष्य में बेहतर व्यवस्था के निर्माण में योगदान दे सकेंगे।
🔹 आरटीआई और संवैधानिक अधिकारों की समझ
पत्र में सूचना के अधिकार (RTI) का उल्लेख करते हुए कहा गया कि विद्यालयी शिक्षा में ही जवाबदेही और अधिकारों की समझ विकसित की जानी चाहिए।
🔹 अध्याय हटाने के बजाय संशोधन की मांग
अशोक कुमार पाण्डेय ने सुझाव दिया कि विवादित अध्याय को हटाने के बजाय संशोधित किया जाए, जिसमें न्यायपालिका की उपलब्धियों, सुधारों और चुनौतियों को संतुलित रूप से शामिल किया जाए।
🔹 संतुलित शिक्षा व्यवस्था की अपील
उन्होंने न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखते हुए शैक्षणिक स्वतंत्रता और सत्य पर आधारित चर्चा को जरूरी बताया। साथ ही ऐसा पाठ्यक्रम तैयार करने की मांग की, जो छात्रों में विश्वास और सुधार की भावना दोनों विकसित करे।
🔹 संलग्न किए गए समाचार पत्र
प्रार्थना पत्र के साथ दैनिक जागरण (25 फरवरी 2026) और अमर उजाला आगरा (26 फरवरी 2026) की समाचार प्रतियां भी संदर्भ के लिए संलग्न की गई हैं।
🔹 लेखक का परिचय
अशोक कुमार पाण्डेय ‘भारत भविष्य?’ पुस्तक के लेखक हैं, जिसका प्रकाशन 2016 और 2018 में हो चुका है। उन्होंने पत्र के माध्यम से अपनी “आंतरिक वेदना” व्यक्त करते हुए न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने की अपील की है।
Author: Soron Live 24

