मार्ग संकेतकों में गलत नाम पर आपत्ति, ‘सोरों (शूकर क्षेत्र)’ की सही पहचान बहाल करने की मांग

कासगंज सोरों जी। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा मेला मार्गशीर्ष के अवसर पर राजमार्ग पर लगाए गए मार्ग संकेतकों में “सोरों सूकर तीर्थ क्षेत्र” अंकित किया गया है, जबकि इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल का सही, मान्य और सरकारी नाम “सोरों (शूकर क्षेत्र)” है। इस त्रुटि को लेकर स्थानीय स्तर पर रोष व्याप्त है।
बताया गया है कि अंग्रेज़ी में भी सही नाम SORON (SHUKAR KSHETRA) है। यही नाम भारत सरकार द्वारा रेलवे स्टेशन, रेल टिकटों, डाकघर की मोहरों तथा अन्य शासकीय अभिलेखों में दर्ज है। इसके बावजूद पर्यटन विभाग द्वारा लगाए गए मार्ग संकेतकों में गलत नाम लिखा जाना ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है।
इस संबंध में संत तुलसीदास नगर विकास समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रभाकर पाराशरी ने उत्तर प्रदेश पर्यटन निदेशक, लखनऊ तथा जिला पर्यटन अधिकारी को ज्ञापन भेजकर मार्ग संकेतकों में शीघ्र संशोधन कराए जाने की मांग की है।
डॉ. प्रभाकर पाराशरी ने कहा कि “सोरों (शूकर क्षेत्र) का नाम शास्त्रों, पुराणों और सरकारी दस्तावेजों में प्रमाणित है। ‘सोरों सूकर तीर्थ क्षेत्र’ नाम न तो आधिकारिक है और न ही परंपरागत। इस प्रकार का गलत नाम धार्मिक भावनाओं को आहत करता है और क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को भ्रमित करता है।”
उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग को चाहिए कि वह तथ्यों के आधार पर तत्काल सभी मार्ग संकेतकों में सही नाम ‘सोरों (शूकर क्षेत्र)’ अंकित कराए, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े। साथ ही चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सुधार नहीं किया गया तो समिति इस विषय को उच्च स्तर तक उठाने के लिए बाध्य होगी।
Author: Soron Live 24

