सोरों शूकर क्षेत्र का उल्लेख नहीं! यूपी सरकार के पर्यटन विज्ञापन में तीर्थनगरी की उपेक्षा पर उठे सवाल

कासगंज/सोरों। (सचिन उपाध्याय)उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आज हिंदुस्तान अखबार में “विकसित उत्तर प्रदेश 2047 : भारत का सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्य” शीर्षक से एक विस्तृत विज्ञापन प्रकाशित किया गया। इसमें अयोध्या, काशी, मथुरा सहित प्रदेश के कई धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को प्रमुखता से स्थान दिया गया है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि सोरों शूकरक्षेत्र—जिसे उत्तर प्रदेश सरकार स्वयं तीर्थ स्थल का दर्जा दे चुकी है—का नाम पूरे विज्ञापन में कहीं भी शामिल नहीं किया गया।
सरकार ने विज्ञापन में बुलंदशहर, हाथरस सहित कई जिलों के मेलों, धार्मिक आयोजनों और पर्यटन परियोजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया है। लेकिन मार्गशीर्ष मेला सोरों शूकर क्षेत्र, जिसे लगभग पाँच वर्ष पहले प्रदेश सरकार ने प्रांतीय मेला का दर्जा प्रदान किया था, उसका जिक्र तक नहीं किया गया।
यह मेला हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होता है और सोरों को प्राचीन काल से ही संत परंपरा, तप, धर्म और संस्कृति की भूमि माना जाता है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में यह सवाल उठ रहा है कि जब सोरों को आधिकारिक रूप से तीर्थ और प्रांतीय मेला घोषित किया जा चुका है, तो फिर इतने महत्वपूर्ण सरकारी विज्ञापन से इसका नाम क्यों गायब है?
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक पर्यटन को लेकर जारी इस बड़े सरकारी प्रकाशन में सोरों की अनुपस्थिति एक गंभीर चूक है, क्योंकि यह क्षेत्र तीर्थ पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश का महत्वपूर्ण बिंदु है।
लोगों का कहना है कि सोरों शूकर क्षेत्र को न केवल विज्ञापन में स्थान मिलना चाहिए था, बल्कि इस प्राचीन तीर्थ का विशेष रूप से उल्लेख होना चाहिए था, क्योंकि यह संत गोस्वामी तुलसीदास, मां गंगा, शूकर क्षेत्र तीर्थ और दत्तात्रेय परंपरा से जुड़ा एक ऐतिहासिक क्षेत्र है।स्थानीय नागरिकों ने सरकार से मांग की है कि आगामी पर्यटन योजनाओं, प्रचार सामग्री और आधिकारिक दस्तावेजों में सोरों शूकर क्षेत्र को उसका उचित स्थान दिया जाए, ताकि तीर्थनगरी की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता देश-दुनिया तक पहुंच सके।
Author: Soron Live 24

