अखिल भारतीय कवि सम्मेलन: सोरों मार्गशीर्ष मेले में गूंजी काव्य–गंगा, देर रात तक झूमते रहे श्रोता

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन: सोरों मार्गशीर्ष मेले में गूंजी काव्य–गंगा, देर रात तक झूमते रहे श्रोता

कासगंज/सोरों।तीर्थनगरी सोरों शूकर क्षेत्र में आयोजित ऐतिहासिक मार्गशीर्ष मेले के पंडाल में शनिवार रात आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन बेहद सफल और यादगार रहा। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि सदर विधायक देवेंद्र सिंह लोधी ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पालिका परिषद सोरों के अध्यक्ष रामेश्वर दयाल महेरे ने की। संचालन विवेक महेरे, तथा कवि सम्मेलन का मंच संचालन प्रसिद्ध संचालक हेमेंद्र पांडे ने किया। संयोजक मनोज भारद्वाज मधुवन ने माता सरस्वती को समर्पित रचना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया।।

मंच पर कवियों की ओज पूर्ण, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य और संवेदनात्मक रचनाओं ने बांधा समां विनीत चौहान (अंतरराष्ट्रीय ओज कवि)
ओजस्वी कवि विनीत चौहान ने राष्ट्रभक्ति से भरे स्वरों में जब कहा—
“सरहद पे खड़े सैनिक की आंखों में जब पानी है,
तब तक चैन से सोना भी हम सबकी नादानी है…।”
तो पंडाल तालियों से गूंज उठा।

हेमंत पांडे (हास्य–व्यंग्य)
हेमंत पांडे ने अपनी चुटीली शैली में व्यंग्य सुनाते हुए कहा—
“नेता जी की बातें भी कितनी अनोखी आईं,
महंगाई पूछो तो कहते—‘ये तो अपनी-अपनी पसंद है भाई’।”
उनकी प्रस्तुति पर दर्शक ठहाकों से लोटपोट हो उठे।

लुटूरी सिंह लट्ठ (हास्य)
लुटूरी सिंह लट्ठ ने अपनी मजाकिया कविता से माहौल हल्का किया—
“बीवी बोली—सुनते हो, फोन क्यों नहीं उठाते?
हम बोले—तुम्हारी आवाज़ याद आ गई,
सोचो—दिल खुद ही कांप जाते!”

राजनकिशोर राज (गीत/श्रृंगार)
उन्होंने प्रेम के कोमल भावों को शब्द देते हुए कहा—
“तेरे बिन साँस चले भी तो लगता है अधूरा,
जैसे कोई भक्ति बिना मंदिर का नूरा…”
उनकी मधुर वाणी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

प्रीति पांडे (महिला स्वर/देशप्रेम)
प्रेरणादायी अंदाज़ में उन्होंने पढ़ा—
“बेटी हूँ, शक्ति हूँ, संकल्पों की बात हूँ,
मैं भारत की माटी का मीठा सौगात हूँ…”
उनके स्वर को पंडाल से जोरदार वाहवाही मिली।

श्यामल मजुमदार (ग़ज़ल/संवेदना)
उन्होंने अपनी ग़ज़ल से श्रोताओं को भावुक कर दिया—
“दिल की दुनिया में अगर सन्नाटा इतना क्यों है,
शायद अपने ही किसी से हमको धोखा हुआ है…”

सरला शर्मा (ओज/नारी शक्ति)
उन्होंने अपनी ओजपूर्ण कविता में कहा—
“औरत को अब कम मत आँको,
लिख दूँ मैं इतिहास नया…”
उनकी प्रस्तुति पर महिलाओं ने विशेष उत्साह दिखाया।

विष्णु उपाध्याय (युवा स्वर)
उन्होंने युवाओं पर केंद्रित पंक्तियाँ सुनाई—
“जुनून जब भी जवानी से मिल जाता है,
तो इतिहास का हर पन्ना बदल जाता है…”

सरोज सरगम (लोक-गीत शैली)
सरोज सरगम ने अपनी लोकधुन से माहौल को मधुर बना दिया—
“मेला आया है गाँव हमारा,
रंग बिखराए चारो ओर…”

उन्नति भारद्वाज (नई पीढ़ी की प्रतिनिधि)
उन्नति की भावनात्मक कविता—
“मेरे सपनों की उड़ान को
ये आसमान काफी है…”
युवा श्रोताओं को खूब पसंद आई।

अतिथियों और कवियों को वराह भगवान की प्रतिमा व शॉल ओढ़ाकर किया सम्मानित
सभी कवियों, मुख्य अतिथि सदर विधायक देवेंद्र सिंह लोधी, संयोजक मनोज ‘मधुवन’ भारद्वाज, तथा पालिका अध्यक्ष रामेश्वर दयाल महेरे को भगवान वराह का प्रतीक चिन्ह, तस्वीर और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
श्रोताओं की भारी भीड़ देर रात तक पंडाल में डटी रही और हर प्रस्तुति पर तालियों, वाह–वाह और सीटियों के साथ कवियों का उत्साह बढ़ाती रही। ????????

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Soron Live 24
Author: Soron Live 24

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