हजारों श्रद्धालुओं देवोत्थान एकादशी के अवसर पर लगाई सोरों की पंचकोसी परिक्रमा

हजारों श्रद्धालुओं एकादशी के अवसर पर लगाई सोरों की पंचकोसी परिक्रमा

देवोत्थान एकादशी पर श्रद्धालुओं ने की शूकरक्षेत्र धाम सोरों जी की पंचकोशी परिक्रमा

सोरों शूकरक्षेत्र धाम, जनपद कासगंज।देवोत्थान एकादशी के पावन अवसर पर रविवार को शूकरक्षेत्र धाम सोरों जी में पारंपरिक पंचकोशी परिक्रमा का आयोजन बड़े ही श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ हर की पौड़ी गंगा तट पर उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा स्नान कर भगवान वराह का पूजन-अर्चन किया और तत्पश्चात पंचकोशी परिक्रमा का शुभारंभ किया।

परिक्रमा का आरंभ प्रातः 8 बजे शूकर क्षेत्र समाज सेवा समिति के संयोजक एवं ब्राह्मण कल्याण सभा के संस्थापक अध्यक्ष श्री शरद कुमार पांडेय के नेतृत्व में किया गया। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने 51 किलो दूध से मां गंगा का दुग्धाभिषेक कर भगवान वराह मंदिर में श्री हरि की आरती एवं पूजन कर परंपरागत मार्ग से परिक्रमा प्रारंभ की।

परिक्रमा में श्रद्धालुओं ने “ॐ जय गंगे, ॐ जय वराह” के संकीर्तन के साथ सूर्यकुंड, दूधेश्वर महादेव, साध्वी रत्नावली समाधि स्थल, बटुक भैरव मंदिर, जयदेवी पीठ, सीताराम मंदिर, तुलसीदास जन्मस्थान, माँ 84 घंटे वाली, शेडू नगरा, बाछरू महाराज स्थल, सीता रसोई, ममता देवी भवन, सिंगल वाले महाराज, करुआ देव महाराज, बनखंडेश्वर महादेव, भागीरथ गुफा, कपिल मुनि आश्रम, चैतन्य महाप्रभु की बैठक तथा काला गोरा भैरव बाबा मंदिर जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन किए। परिक्रमा का समापन भगवान वराह मंदिर पर हुआ।

पूरे मार्ग में प्रसाद एवं जलपान की समुचित व्यवस्था की गई थी। सीता रसोई, ममता देवी भवन तथा बाछरू तीर्थ सहित विभिन्न स्थलों पर समिति सदस्यों एवं स्थानीय भक्तों द्वारा प्रसादी वितरण किया गया। प्रमुख सेवा कार्यों में रामदर्शन महेरे, पूरन श्रीवास्तव, ओमप्रकाश मौर्य, श्याम बड़गैयां, सौरभ दीक्षित, मुन्नालाल बड़गियां, आशीष भारद्वाज, वीरेन्द्र सिंह, बदन सिंह आदि की विशेष भूमिका रही ब्राह्मण कल्याण सभा संस्थापक अध्यक्ष, एवं शूकर क्षेत्र समाज सेवा समिति संयोजक श्री शरद कुमार पांडेय ने देवोत्थान एकादशी पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देवोत्थान एकादशी का पर्व बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्री विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और सृष्टि का संचालन पुनः संभालते हैं। इसी के साथ चातुर्मास का समापन होता है तथा विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य सभी शुभ एवं मांगलिक कार्यों की शुरुआत की जाती है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि देवोत्थान एकादशी वर्ष भर की सभी एकादशियों में सर्वोपरि मानी जाती है। इस दिन विधि-विधानपूर्वक व्रत, पूजा एवं भगवान विष्णु का स्मरण करने से पापों का नाश होता है और सुख, शांति एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है। ब्राह्मण कल्याण सभा कोषाध्यक्ष श्री आशीष भारद्वाज जी ने बताया – शूकर क्षेत्र धाम सोरों जी का प्राचीन बाछरू तीर्थ (वत्सासुर वध स्थल) अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक स्थान है। यहीं भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बड़े भाई बलराम और सखाओं के साथ गाय-बछड़ों को चराने की बाल लीलाओं के दौरान वत्सासुर राक्षस का वध किया था, जो छलपूर्वक बछड़े का रूप धारण कर आया था। इसी कारण यह स्थान “बाछरू तीर्थ” के नाम से प्रसिद्ध हुआ। उन्होंने बताया कि सोरों में स्थित यह पावन क्षेत्र ब्रजभूमि का ही अंग है, जहाँ कनक सारोवर, सहस्त्रकुंड, रामकुंड, अड़वारो कुंड, रावरी कुंड, सूर्यकुंड आदि पवित्र सरोवर स्थित हैं। यही वह स्थल है, जहाँ गर्ग संहिता और सूरसागर में वर्णित श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ घटित हुई थीं।
पंचकोशी परिक्रमा में भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया। भक्तों ने कहा कि देवोत्थान एकादशी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह आत्मजागरण और जीवन में शुभारंभ का प्रतीक है। इस अवसर पर क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिनमें शिवानंद उपाध्याय, विनोद दीक्षित, शशांक दीक्षित, गिरजाशंकर पाठक, शिव बेंदेल, राधाकृष्ण विजय, राजकुमार गौड़, अशोक कुमार पांडेय, अजयपाल सिंह, वीरेन्द्र सिंह, जयप्रकाश त्रिवेदी, खूब सिंह, ईश्वरी प्रसाद, हरीश बाबू, सतीश चन्द्र दरुआपुर, राधेश्याम दरुआपुर, प्रदीप उपाध्याय, अनुपम मिश्र (अणु), योगेश उपाध्याय, जितेन्द्र पाल सिंह, लाखन सिंह, तेजपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में भक्तजन शामिल रहे।

 

Soron Live 24
Author: Soron Live 24

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