चार साल बाद भी अधूरा सपना — विकास की बाट जोहती तीर्थनगरी सोरों! सरकार की घोषणा रहीं कागज़ों तक, श्रद्धालु अब भी सुविधाओं के मोहताज

चार साल बाद भी अधूरा सपना — विकास की बाट जोहती तीर्थनगरी सोरों! सरकार की घोषणा रहीं कागज़ों तक,श्रद्धालु अब भी सुविधाओं के मोहताज

 

कासगंज/सोरों उत्तर प्रदेश ( सचिन उपाध्याय)भगवान वराह की पावन धरती, गंगा के पवित्र तट और अनगिनत श्रद्धालुओं की आस्था से सजी तीर्थनगरी सोरों शूकर  क्षेत्र आज भी अपने विकास के इंतज़ार में है।
सरकार ने चार साल पहले बड़े गर्व से इसे “तीर्थ स्थल” घोषित किया था, लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि विकास का दीपक अब तक नहीं जला।

संघर्ष से जीता गया तीर्थ का दर्जा, लेकिन वादे रह गए अधूरे

28 अक्टूबर 2021 — यह वह तारीख थी जब सोरों ने इतिहास लिखा।
भूपेश कुमार शर्मा के नेतृत्व में चले आमरण अनशन ने पूरे प्रदेश का ध्यान खींचा।
75 घंटे चले आंदोलन के बाद सरकार ने झुककर सोरों सुकरक्षेत्र को तीर्थ स्थल घोषित किया।
उस समय उम्मीद थी कि यह घोषणा क्षेत्र के कायाकल्प का आरंभ बनेगी — लेकिन अफसोस, चार साल बाद भी वह सपना अधूरा है।

कागज़ी तीर्थस्थल — धरातल पर टूटी उम्मीदें तीर्थ दर्जा मिलने के बाद यहाँ होना चाहिए था

घाटों का विस्तृत सौंदर्यीकरण ,वराह मंदिर का कॉरिडोर बनाकर पुनर्निर्माण व विस्तारतीर्थ परिक्रमा मार्ग का विस्तार कर निर्माण श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, विश्राम गृह व प्रसाधन की उच्च स्तरीय सुविधाएँ।नगर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना

धार्मिक पर्यटन सर्किट से जुड़ाव

लेकिन आज भी गंगा घाटों तक पहुँचने वाली सड़कों पर गड्ढे हैं, नालियाँ जाम हैं, बिजली की तारें झूल रही हैं और तीर्थ यात्रा की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।
सरकार की घोषणाएँ ‘फाइलों में सीमित’ और जनता की उम्मीदें ‘आस्था में दबी’ रह गई हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय का ट्वीट बना था आशा की किरण 2021 में मुख्यमंत्री कार्यालय से ट्वीट हुआ था

“जनभावनाओं का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने सोरों सुकर क्षेत्र को तीर्थस्थल घोषित किया है।”उस दिन से लोगों को लगा था — अब सोरों बदल जाएगा।
लेकिन चार साल बाद जनता पूछ रही है —
“जब घोषणा हुई थी इतनी तेजी से, तो योजनाएँ क्यों रुकी पड़ी हैं?”

संभावित विकास योजनाएँ — जिनसे चमक सकता है सोरों

अगर सरकार वाकई में सोरों के तीर्थ स्वरूप को साकार करना चाहती है, तो यहाँ निम्नलिखित योजनाएँ तत्काल शुरू करनी चाहिए —

????️ 1. गंगा घाट विस्तृत विकास योजना

वराह घाट, तुलसी घाट और हरि पैड़ी घाट का सौंदर्यीकरण

सीढ़ियों, लाइटिंग और रैलिंग का निर्माण

आरती स्थल का आधुनिकीकरण

2. वराह मंदिर तीर्थ परिसर पर भव्य कॉरिडोर बनाकर पुनर्निर्माण

मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए हॉल, धर्मशाला और फूड कोर्ट

धार्मिक पुस्तकालय और आध्यात्मिक अध्ययन केंद्र

3. तीर्थ परिक्रमा मार्ग

सम्पूर्ण सोरों को जोड़ने वाला 15 किमी का तीर्थ मार्ग

मार्ग पर सौर लाइटें और CCTV सुरक्षा व्यवस्था

4. धार्मिक पर्यटन पैकेज

सोरों को वृंदावन, अयोध्या, वाराणसी, चित्रकूट जैसे तीर्थों से जोड़ना

टूरिज़्म डिपार्टमेंट द्वारा “गंगा वराह तीर्थ यात्रा सर्किट” शुरू करना

5. नगर सौंदर्य एवं सफाई मिशन

नगर की सड़कों का पुनर्निर्माण

गंगा किनारे ठोस अपशिष्ट निस्तारण प्लांट

हर वार्ड में कचरा उठाने की आधुनिक व्यवस्था

6. वराह सरोवर पुनर्जीवन योजना

सरोवर की सफाई, किनारों का विकास,लाइटिंग वाले विशाल फव्वारे और नाव संचालन

मार्ग शीर्ष जैसे भव्य धार्मिक र्मिक मेले व उत्सवों के लिए प्रदेश सरकार से बड़ा बजट और स्थायी मंच

जनता का कहना — “अब चाहिए काम, न कि बयान”स्थानीय लोगो ने कहा — “तीर्थ दर्जा देकर सरकार ने सम्मान दिया था, लेकिन विकास के बिना यह सम्मान अधूरा है। अब हमें फोटो नहीं, प्रोजेक्ट चाहिए।

भूपेश कुमार शर्मा ने कहा — “सोरों का संघर्ष सिर्फ तीर्थ के नाम के लिए नहीं था, बल्कि उसकी पहचान और प्रगति के लिए था। इसके लिए अगर हमें पुनः आंदोलन को खड़ा करना पड़ा तो हम पीछे नहीं हटेगे सरकार को जनता की आस्था का मान रखना चाहिए।”

यदि सरकार ने योजनाओं को धरातल पर नहीं उतारा, तो तीर्थस्थल का दर्जा सिर्फ एक राजनैतिक घोषणा बनकर रह जाएगा।

Soron Live 24
Author: Soron Live 24

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