आश्विन मास की अमावस्या को हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर किया पितृ तर्पण



जनपद कासगंज के तीर्थस्थल सोरों सूकर क्षेत्र में पितृ अमावस्या को हजारों श्रद्धालुओं ने हरि की पौड़ी गंगा जी में स्नान किया। आश्विन मास की अमावस्या को नगर एवं आस-पास के क्षेत्रों के साथ साथ दूर दराज जैसे कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, गुजरात, दिल्ली आदि से आए श्रद्धालुओं ने गंगा जी में स्नान कर विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना की ओर पित्रों को जल तर्पण किया। तथा ब्राह्मणों को भोजन , दान देकर पुण्य लाभ प्राप्त किया। लड्डू वाले बालाजी के घाट पर विद्वान आचार्य शशिधर द्विवेदी जी, पण्डित प्राज्ञेश द्विवेदी, पण्डित सक्षम द्विवेदी पितरों को तर्पण करा रहे हैं। *आचार्य शशिधर द्विवेदी जी*बताते हैं कि जो भी मनुष्य अपने-अपने पितरों के निमित्त विधि विधान पूर्वक तर्पण करते हैं उनके पितृश्वर प्रसन्न होकर उनको नाना प्रकार के आशीर्वाद प्रदान करते हैं। जैसे कि धन, वैभव, यश कीर्ति, आरोग्यता और जो मनुष्य अपने पितरों के निमित्त तर्पण नहीं करते हैं, उनके पितर उनसे विरुद्ध होकर अपने लोक को वापस चले जाते हैं। वहीं *पण्डित प्राज्ञेश द्विवेदी* कहते हैं कि तर्पण तीन प्रकार के होते हैं । देव तर्पण, ऋषि तर्पण, पितृ तर्पण जो कि तिल, चावल, जो, कुशा के माध्यम से किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि पितृ दोष या पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, गंगा या किसी सरोवर में करें। अगर किसी मनुष्य के पास गंगा या सरोवर नहीं है तो वह मनुष्य अपने घर में पीतल के पात्र हैं जो चावल आदि कुशा के माध्यम से देव, ऋषि, एवं पितृ तर्पण के सकते हैं। उन्होंने बताया कि 16दिन के लिए पितृ लोक खुला रहता है। इन 16दिनों में तर्पण करने से पितर प्रसन्न होते हैं। ओर पितृलोक से हमारे पितृश्वर हमको अनेक प्रकार के आशीर्वाद देते हैं। पितृ पक्ष या आश्विन मास की अमावस्या को ब्राह्मण भोजन, गाय को भोजन, यज्ञ होम, पितृ शान्ति यज्ञ करने से यश, कीर्ति, धन, वैभव, आरोग्यता की प्राप्ति होती है।
Author: Soron Live 24

