वैदिक धर्म में सिर पर शिखा (चोटी)धर्म करने का असाधारण महत्व है

 

वैदिक धर्म में सिर पर शिखा (चोटी) धर्म करने का असाधारण महत्व है

लेखक कन्हैया वशिष्ठ
ज्योतिर्विद व रत्न विशेषज्ञ तीर्थ नगरी सोरों शूकर क्षेत्र यूपी।।

प्रत्येक बालक के जन्म के बाद मुंडन संस्कार के पश्चात शिर के उस विशेष भाग पर गौ के नवजात बच्चे के खुर के प्रमाण (बरावर) आकार की चोटी रखने का विधान है।

यह वही स्थान होता है जहां सुषुम्ना नाड़ी पीठ के मध्य भाग में से होती हुई ऊपर की और आकर समाप्त होती है और उसमें से शिर के विभिन्न अंगों में वात संस्थान का संचालन करने को अनेक सूक्ष्म वैट नदियों का प्रारंभ होता है।

सुषुम्ना नाड़ी सम्पूर्ण शरीर के वात संस्थान का संचालन करती है
यदि इसमें से निकलने बाली कोई भी नाड़ी किसी प्रकार सुस्त पड जाती है तो उस अंग को फालिज मारना कहते है समस्त शरीर को शक्ति केवल सुषुम्ना नाड़ी से ही मिलती है।

सिर के जिस भाग पर चोटी रखी जाती है उसी स्थान पर अस्थि के नीचे लघु मस्तिष्क का स्थान होता है जो गौ के नवजात बच्चे के खुर के ही आकार का होता हूं और उतनी ही बड़ी शिखा उसके ऊपर रखी जाती है।

बाल गर्मी पैदा करते है बालो में विद्युत का संग्रह रहता है जो सुषुम्ना नाड़ी को उतनी ऊष्मा हर समय प्रदान करते रहते है जितनी कि उसे समस्त शरीर के वात नाड़ी संस्थान को जाग्रत व उत्तेजित करने के लिए आवश्यकता होती है

इससे मानव का वात नाड़ी संस्थान आवश्यकतानुसार जागृत रहते हुए समस्त शरीर को बल देता है किसी भी अंग में फालिज पड़ने का भय नही रहता है। और साथ ही लघु मस्तिष्क विकसित होता रहता है जिसमे जन्म जन्मांतरों के एवं वर्तमान जन्म के संस्कार संग्रहित रहते है।

सुषुम्ना का जो भाग लघु मस्तिष्क को संचालित करता है वह उसे शिखा द्वारा प्राप्त ऊष्मा से चैतन्य बनाता है इससे स्मरण शक्ति भी विकसित होती है।

वेद में शिखा रखने का विधान कई स्थानों पर मिलता है अथर्व वेद देखें —
शिखिभ्यः स्वाहा (19,22,15)
डॉक्टर क्लार्क ने अपनी पुस्तक में है
मुझे विश्वास हो गया है कि आर्यो का हर एक कार्य नियम विज्ञान से भरा हुआ है चोटी रखना हिन्दुओ का धार्मिक चिन्ह ही नही बल्कि सुषुम्ना की रक्षा के लिए ऋषियों की खोज का एक विलक्षण चमत्कार है
एक अंग्रेज डॉक्टर विक्टर ई क्रोमान ने अपनी पुस्तक विरिलकल्पक में लिखा है
पागलपन अंधत्व तथा मस्तिष्क के रोग शिखा धरियो को नही होते थे वे अब शिखा हीनो में अत्यधिक देखे जा सकते है।।
लेखक कन्हैया वशिष्ठ
ज्योतिर्विद व रत्न विशेषज्ञ तीर्थ नगरी सोरों शूकर क्षेत्र यूपी।।

Soron Live 24
Author: Soron Live 24

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