बंदरों के बढ़ते आतंक से तीर्थ नगरी सोरों के लोग परेशान
सोरों में बंदरों की टोलियां देख थम जाते है कदम, पकड़वाने की मांग

फोटो -सोरों कस्बे की एक गली में आतंक माचते बंदर।
कासगंज/सचिन उपाध्याय:तीर्थ नगरी सोरों मेें बंदरों के बढ़ते आतंक से स्थानीय लोग परेशान हैं। आए दिन बंदरों के हमले से कोई न कोई घायल हो जाता है। बंदरों के झुंड के सामने से गुजरना खतरे से खाली नहीं होता। कस्बा के अंदर दहलान, टेडा नीम , मुख्य बाजार ,हरि की पैड़ी । यहां सुबह से ही बंदरों की आमद हो जाती है। बंदरों से बचाव के लिए लोगों ने घरों छतों में लोहे की जालियां लगवाई है। इसके बावजूद बंदरों का आंतक कम नही है। इससे लोग बच्चे महिला डरे सहमे बचते बचाते निकलते है। तीर्थ नगरी का शायद ही कोई गली मोहल्ला होगा। जहां बंदरों का उत्पात नही रहता हो। दिन के साथ साथ रात को भी गली मोहल्लों बाजार में बंदरों का जमावड़ा और रास्ते पर बंदरों का राज रहता है। बंदर आए दिन लोगों को हमला कर घायल कर देते है। ऐसे में लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। बंदर हमलावर होने के साथ ही आते जाते समय रास्ते में बंदर लोगों के हाथ से सामान तक छीन लेते है। कस्बा में 25 वार्ड हैं और हर वार्ड में बंदरों के बड़े-बड़े झुंड हैं। पैदल चलने वाले कई लोग इनके झुंड को देखकर अपना रास्ता बदल लेते हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि तीर्थ नगरी में बंदरों का आंतक इतना फैल गया है कि यात्रियों के अलावा दुकानदार भी काफी परेशान हो ते हैं। बंदरों की वजह से हर रोज दुकानदरों को सैकड़ों रुपयों का नुकसान होता है। कई दुकानदारों ने बंदरों से सामान बचाने के लिए दुकान पर जालियां लगा ली हैं । बंदर इतने चालाक हैं कि घर के दरवाजों की कुंडी खोलकर फ्रिज में रखा सामान ले जाते हैं। इसके अलावा बंदर सुखाने रखे कपड़े ले जाते हैं और जब तक उन्हें कुछ खाने को न दिया जाए बंदर कपड़े नहीं छोड़ते। लोगों ने यह भी कहा कि कस्बे के कुछ स्थान ऐसे हैं जहां से गुजरना हो तो हाथ में डंडा लेना पड़ता है नहीं तो बंदर हमला कर देते हैं। बंदरों के डर से लोग बच्चों को छतों पर अकेला नहीं भेजते और स्कूल भी खुद छोड़ने जाते हैं। कई बार तो लोग बंदरों के हमले में गंभीर से घायल हो चुके है। तीर्थ नगरी चौराहे, तिराहे मोहल्लों में बंदर बहुत ज्यादा है। यहां पर बच्चों को अकेला नहीं भेज सकते है। लोगों ने बताया कि बंदरों की वजह से आए दिन बंदर बिजली के तार, डिस के तार, काट देते है। ऐसे में लोगों भारी परेशानी होती है। कस्बा के प्रथामिक स्वास्थ्य केंद्र पर हर रोज 10 से 20 तक लोग बंदर के काटने के बाद रेबीज बीमारी से बचने के लिए पहुंचते है। स्थानीय लोगों ने नगर पालिका से मांग की है कि बंदरों के आतंक पर काबू पाने के लिए विशेष ध्यान दिया जाए ताकि नगर में इनके आतंक पर काबू पाया जा सके।
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फोटो -सोरों कस्बे की एक गली में आतंक माचते बंदर।
Author: Soron Live 24

