कहीं पीने का पानी नहीं तो कहीं यूं ही बर्बाद हो रहा पानी
धुलाई सेंटर बर्बाद कर रहे प्रतिदिन हजारों लीटर पीने का पानी
कासगंज जनपद में भूगर्भ जलस्तर नीचे गिर रहा है। इसके बाद भी जनपद में पानी का दोहन जारी है। इसकी बानगी धुलाई केंद्रों पर देखी जा सकती हैं। यहां रोजाना हजारों लीटर साफ पेयजल बर्बाद कर दिया जाता है। इस मामले में जिम्मेदार कार्रवाई करने के बजाय खामोश हैं। जनपद में दर्जनो से अधिक धुलाई केंद्र हैं। यहा हर रोज सैकडों छोटे, बड़े वाहनों की धुलाई होती है। छोटे वाहन की धुलाई में सौ लीटर से अधिक व बड़े वाहन की धुलाई में तीन सौ लीटर से अधिक पानी बहाया जाता है। धुलाई केंद्रों पर शुद्ध पानी की बर्बादी पर अंकुश लगाने के लिए जिम्मेदार विभाग कुछ भी नहीं कर रहे हैं। जिले केअधिकारियों को धुलाई केंद्रों की संख्या की भी जानकारी नहीं हैं। लगातार हो रहे पानी के दोहन के कारण अगले बीस वर्ष का ही पानी का स्टॉक जमीन में बचा है। पीने के पानी के भी लाले पढ़ने वाले हैं। लोग पानी को इस तरह से बर्बाद कर रहे है। विभाग ने भी उच्चाधिकारियों को बता दिया है कि वर्ष 2040 के बाद जमीन के नीचे पानी नहीं रहेगा। अगर ऐसा हुआ तो पानी के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ेगा। कस्बा में जल दोहन के कारण लगातार पानी का जल स्तर नीचे जा रहा है। लघु सिंचाई के आंकड़ों पर नजर डाले तो महज 20 वर्षों में पीने के पानी के लाले होंगे। जिस तरह से पानी का दोहन हो रहा है उस तरह से पानी रिचार्ज नहीं हो रहा है। पानी का जो खर्चा है वह लाखों एमएल में है। जबकि रिचार्ज होने की संख्या ना के बराबर है। नहरों और नदियों को समय पर सिल्ट ना निकलने के कारण पानी जमीन के नीचे नहीं जा रहा है। इससे भी वाटर लेबल नहीं बढ़ पा रहा है।
Author: Soron Live 24


अधिकारियों को धुलाई केंद्रों की संख्या की भी जानकारी नहीं हैं। लगातार हो रहे पानी के दोहन के कारण अगले बीस वर्ष का ही पानी का स्टॉक जमीन में बचा है। पीने के पानी के भी लाले पढ़ने वाले हैं। लोग पानी को इस तरह से बर्बाद कर रहे है। विभाग ने भी उच्चाधिकारियों को बता दिया है कि वर्ष 2040 के बाद जमीन के नीचे पानी नहीं रहेगा। अगर ऐसा हुआ तो पानी के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ेगा। कस्बा में जल दोहन के कारण लगातार पानी का जल स्तर नीचे जा रहा है। लघु सिंचाई के आंकड़ों पर नजर डाले तो महज 20 वर्षों में पीने के पानी के लाले होंगे। जिस तरह से पानी का दोहन हो रहा है उस तरह से पानी रिचार्ज नहीं हो रहा है। पानी का जो खर्चा है वह लाखों एमएल में है। जबकि रिचार्ज होने की संख्या ना के बराबर है। नहरों और नदियों को समय पर सिल्ट ना निकलने के कारण पानी जमीन के नीचे नहीं जा रहा है। इससे भी वाटर लेबल नहीं बढ़ पा रहा है।