कासगंज:
शूकर क्षेत्र सोरों जी की निर्जला एकादशी पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई पंच कोशी परिक्रमा
आदि तीर्थ शूकर क्षेत्र धाम, सोरों जी पंचकोशीय परिक्रमा हरि की पौड़ी श्री गंगा जी मैं श्रद्धालुओं द्वारा स्नान करने के उपरांत भगवान वराह मंदिर से भगवान वराह का पूजन अर्चन करने के बाद आज दिनांक 18 जून 2024 दिन मंगलवार निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर प्रातः 6:00 बजे शूकर क्षेत्र पंचकोसी परिक्रमा समाज सेवा समिति आदि तीर्थ शूकर क्षेत्र धाम, सोरों जी के तत्वाधान में प्रारंभ हुई | परिक्रमा प्रारंभ होकर श्री गंगा जी की परिक्रमा करते हुए सूर्य कुंड, दूधेश्वर, साध्वी रत्नावली समाधि स्थल होते हुए बटुक भैरव मंदिर जयदेवी पीठ होते हुए ग्राम देवी मंदिर गोस्वामी तुलसीदास जन्म स्थान मंदिर होते हुए 84 घंटे वाली मां पर प्रस्थान किया उसके बाद सेडू नगरा होते हुए बाछरू महाराज से सीता जी की रसोई होते हुए भक्तों द्वारा ममता देवी भवन प्रेम जी की बगीची पर श्रद्धालुओं द्वारा जलपान की व्यवस्था कराई गई | वहां से सिंगल वाले महाराज पर विश्राम रहा महाराज पर श्रद्धालुओं द्वारा फलाहार की व्यवस्था सभी श्रद्धालुओं को कराई गई उसके बाद करुआ देव महाराज होते हुए बन खंडेश्वर महादेव, कपिल मुनि आश्रम ,भागीरथ गुफा होते हुए चैतन्य महाप्रभु जी की बैठक के बाद अगला पढ़ाव काला गोरा भैरव बाबा मंदिर के बाद पंचकोशीय परिक्रमा भगवान वराह मंदिर पर पूर्ण हुई |शूकर क्षेत्र पंचकोसी परिक्रमा समाज सेवा समिति संयोजक एवं ब्राह्मण कल्याण सभा संस्थापक अध्यक्ष शरद कुमार पांडे ने बताया – सालभर में 24 एकादशी आती हैं, 12 शुक्ल पक्ष की और 12 कृष्ण पक्ष की और हर एकादशी का खास महत्व होता है. लेकिन, शास्त्रों में निर्जला एकादशी को मोक्ष देने वाली एकादशी कहा जाता है, इसे भीम सेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन व्रत करने के अलावा गंगा में स्नान करने और दान करने का विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब वेदव्यास ने पांडवों को धर्म, अर्थ, कर्म और मोक्ष देने वाली एकादशी व्रत का संकल्प कराया था शरद कुमार पांडे ने ब्राह्मणों को दान देने का महत्व समझाते हुए बताया – ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष में जो शुभ एकादशी होती है उसका निर्जला व्रत करना चाहिए. उस दिन ब्राह्मणों को शक्कर के साथ जल के घड़े दान करने चाहिए. ऐसा करने से मनुष्य भगवान विष्णु के समीप पहुंच सकता है. द्वादश तिथि को ब्राह्मणों का भोजन करने के बाद खुद भोजन ग्रहण करें. इस तरह से व्रत का संकल्प लेने से और व्रत करने से सभी पापों का नाश हो जाता है. जो व्यक्ति इस एकादशी पर सच्चे मन से व्रत करता है वो स्वर्ग लोक में जाता है. पंचकोशीय परिक्रमा में मुख्य रूप से शिवानंद उपाध्याय, प्रवीण कुमार द्विवेदी, विनोद दीक्षित, शशांक दीक्षित, राधे मोहन झा, गिरजा शंकर पाठक, नेकसू प्रधान ,भरत शर्मा, ब्राह्मण कल्याण सभा जिला अध्यक्ष पवन वशिष्ठ सैलई ,सतीश चंद्र पाराशर पूर्व प्रधान हसीगंज, सुरेंद्र शंखधार बदायूं ,रामकिशोर शर्मा बरसूआ, सत्येंद्र ,हरदयाल नगला गोकुल, मुन्ना लाल ग्राम भिटोना ,राहुल, सुशीला ,स्वामी चरण ,राम बेटी ,पूजा भिटोना ,नीलम, चंद्रावती ,डालचंद ,सुशीला देवी ,कृष्णा गोकुल नगर ,वंश उपाध्याय रेलवे रोड बरेली ,शीतल उपाध्याय, सनी नगला गंजी ,उपेंद्र उपाध्याय, मनोज, गगन, निशा नगला गोकुल ,मनोज पिवारी, सेवाराम रस्तोगी बहेड़ी बरेली सहित हजारों श्रद्धालुओं ने पंचकोशीय परिक्रमा लगाकर भगवान वराह का आशीर्वाद प्राप्त किया।।
Author: Soron Live 24

