???? सूर्य षष्ठी पर सोरों के सूर्यकुंड में दीपों का सागर, गूंजे आरती के स्वर





कासगंज ब्यूरो, सोरों।भगवान सूर्यदेव की तपस्थली सूकरक्षेत्र स्थित पंचकोसी परिक्रमा मार्ग के पावन सूर्यकुंड पर शुक्रवार देर शाम सूर्य षष्ठी के अवसर पर दीपमालिका और भव्य आरती का आयोजन किया गया।
सैकड़ों दीपों से सजा सूर्यकुंड अलौकिक दृश्य प्रस्तुत कर रहा था, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दीपदान कर सूर्यदेव की आराधना की।
आचार्य शशिधर शास्त्री ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार यही वह स्थल है जहाँ सूर्यदेव ने पुत्र प्राप्ति की कामना से सत्रह हजार वर्ष तक कठोर तपस्या की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान वराह ने यहीं सूर्यदेव को गीता का उपदेश दिया और फलस्वरूप सूर्यदेव को यम व यमुना नामक संतान की प्राप्ति हुई। तभी से यह पावन स्थान वैवस्वत तीर्थ के नाम से विख्यात है।
यह भी मान्यता है कि यहाँ स्नान-भोजन करने से मनुष्य को सूर्यलोक की प्राप्ति होती है और यदि किसी पुण्यात्मा की यहाँ मृत्यु हो जाती है तो वह यमलोक में प्रवेश नहीं करता।
दीपमालिका व आरती के इस आयोजन में पं. धर्मधर द्विवेदी, आचार्य शशिधर द्विवेदी, वेदधर द्विवेदी, चेयरमैन रामेश्वर दयाल महेरे, सचिन चौधरी, दुर्गाशंकर तिवारी, मोनू दुबे, आचार्य राहुल वाशिष्ठ, विनोद उपाध्याय, प्राज्ञेश द्विवेदी सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
???? फोटो- सूर्यकुंड पर सूर्य षष्ठी के अवसर पर दीपदान व आरती करते श्रद्धालु
Author: Soron Live 24

