आपातकाल के 50 साल
पत्रकारों को भी नहीं बख्शा गया, जेल में ठूंसा गया

पत्रकार डॉ:प्रभाकर पराशरी
कासगंज/सोरों। आपातकाल 1975 के दौर में कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के समाचार छापने तथा श्रीमती इंदिरा गांधी की नीतियों की आलोचना करने पर पत्रकारों को भी नहीं बख्शा गया। इसी प्रताड़ना के शिकार सोरों के वरिष्ठ पत्रकार डा. प्रभाकर पाराशरी भी हुए। 14 अगस्त 75 को सायं एटा के न्यायालय ने पत्रकार डा. प्रभाकर पाराशरी सहित चार लोगों को शासन के दबाव में जेल में दिया। 14 से 15 अगस्त 1975 को एटा जिला जेल में थे 16 अगस्त को जमानत पर रिहा हुए।
घटनाक्रम के अनुसार डा. प्रभाकर पाराशरी उस समय भी अमर उजाला से संवाददाता, सूकरक्षेत्र समाचार साप्ताहिक के प्रबंध संपादक तथा तुलसी मानस पत्रिका के संपादक थे। सोरों क्षेत्र के एक ग्रामीण कांग्रेस नेता जो न्योली शुगर फैक्ट्री के चहेते थे उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का समाचार प्रकाशित किया। न्यायालय में वह भ्रष्टाचार प्रमाणित भी हो गया परंतु न्योली शुगर फैक्ट्री के उद्योगपति तथा कांग्रेस नेता के प्रभाव में न्यायालय ने तथ्यों को नकारते हुए पत्रकार डा. प्रभाकर पाराशरी सहित चार लोगों को छह माह कारावास की सजा सुनाई। 14 तथा 15 अगस्त को जेल में रहे 16 अगस्त को जिला न्यायालय ने जमानत दे दी। जमानत पर आने के बाद भी कांग्रेस नेताओं द्वारा पुलिस पर दवाब डालकर जेल भेजने का षड्यंत्र चला रहा परंतु उस समय के एटा के जिलाधिकारी श्री अखंड प्रताप सिंह ने पुलिस को सख्त निर्देश दिए कि निष्पक्ष पत्रकार को हमेशा मीसा डीआईआर में न भेजा जावे। बाद में 2 वर्ष बाद एटा जिला न्यायालय ने ससम्मान बरी कर दिया।
Author: Soron Live 24

