शूकर क्षेत्र सोरों जी की योगिनी एकादशी पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई पंचकोशी परिक्रमा

कासगंज:शूकर क्षेत्र धाम, सोरों जी पंचकोशीय परिक्रमा हर की पौड़ी श्री गंगा जी मैं श्रद्धालुओं द्वारा स्नान करने के उपरांत भगवान वराह मंदिर से भगवान वराह का पूजन अर्चन करने के बाद शनिवार को योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर प्रातः 7:00 बजे शूकर क्षेत्र पंचकोसी परिक्रमा समाज सेवा समिति आदितीर्थ शूकरक्षेत्र धाम, सोरों जी संयोजक, ब्राह्मण कल्याण सभा संस्थापक / अध्यक्ष शरद कुमार पांडे के नेतृत्व में प्रारंभ हुई | शरद कुमार पांडे ने योगिनी एकादशी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया – आषाढ़ मास की कृष्ण एकादशी को “योगनी” अथवा “शयनी” एकादशी कहते है। हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। उनमें आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं। आषाढ़ कृष्ण एकादशी का नाम योगिनी है। इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यह इस लोक में भोग और परलोक में मुक्ति देने वाली है। यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। यह योगिनी एकादशी का व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल देता है। इसके व्रत से समस्त पाप दूर हो जाते हैं और अंत में स्वर्ग प्राप्त होता है। शरद कुमार पांडे ने सूकर क्षेत्र धाम सोरों जी का धार्मिक महत्व को समझाते हुए बताया – हिरण्याक्ष दैत्य बड़ा ही बलवान था। देवताओं पर चढ़ाई करके देवताओं को जीत लिया। लोकों का अधिपति बनकर बैठ गया। देवता छिप गये। भगवान विष्णु की आराधना करने लगे। तब भगवान वाराह का रूप धारण इसी शूकर क्षेत्र में ब्रह्माजी की नासिका से प्रकट हुए। भगवान वारह ने पाताल में जाकर दैत्य से युद्ध कर उसका वध किया। पृथ्वी का भार हरण किया। भगवान अपने अवतार का उद्देश्य पूरा करने के बाद निज देह का परित्याग इसी सोरों शूकर पुण्य क्षेत्र में किया। यहीं पर विष्णु के अवतार भगवान वाराह का मंदिर है।

सीता की रसोई है, जिसके बारे में मान्यता है कि सीता जी ने यहां भोजन पकाया था। सूर्य कुंड है, जिसके पानी से खीर बनाने की परंपरा है। तुलसीदास की ससुराल है। धर्म क्षेत्र के जानकारों के अनुसार सृष्टि का उद्गम स्थल सोरों तीर्थनगरी को ही माना जाता है। सोरों सूकर क्षेत्र उत्तर प्रदेश के जनपद कासगंज मुख्यालय से लगभग 16 किलोमीटर दूर विश्व विख्यात आदितीर्थ सोरों सूकर क्षेत्र है। यहां पहुंचने के लिए बस और रेल मार्ग दोनों ही साधन हैं। तीर्थनगरी सोरों के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र के अलावा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आते हैं। पंचकोशीय परिक्रमा समिति के सहसंयोजक आशीष भारद्वाज विनोद दीक्षित शैलेश यादव बदन सिंह ने बताया -पंचकोशीय परिक्रमा हर की पौड़ी श्री गंगा जी में स्नान करने के बाद भगवान वाराह प्रांगण से प्रारंभ होकर श्री गंगा जी की परिक्रमा करते हुए सूर्यकुंड, दूधेश्वर, साध्वी रत्नावली समाधि स्थल होते हुए बटुक भैरव मंदिर जयदेवी पीठ होते हुए ग्राम देवी मंदिर गोस्वामी तुलसीदास जन्म स्थान मंदिर होते हुए 84 घंटे वाली मां पर प्रस्थान किया उसके बाद शेडू नगरा होते हुए बाक्षरू महाराज से सीता जी की रसोई पर राम दर्शन महेरे नीरज पूरन श्रीवास्तव मुस्कान ओमप्रकाश मौर्य आकाश महेरे सहित उनके साथियों ने ठंडी लस्सी की प्रसादी बाटी वहां से होते हुए भक्तों द्वारा ममता देवी भवन प्रेम जी की बगीची पर गंगा वराह महासभा अध्यक्ष सुनील तिवारी एवं उनके अन्य सदस्यों द्वारा श्रद्धालुओं को जलपान की व्यवस्था कराकर लस्सी एवं आम प्रसादी वितरित की | वहां से सिंगल वाले महाराज पर विश्राम रहा महाराज पर अवधेश दीक्षित एवं श्रद्धालुओं द्वारा फलाहार एवं लस्सी की व्यवस्था सभी श्रद्धालुओं को कराई गई उसके बाद करुआ देव महाराज होते हुए बनखंडेश्वर महादेव पर ब्राह्मण कल्याण सभा कोषाध्यक्ष आशीष भारद्वाज सूकर क्षेत्र पंचकोशीय परिक्रमा समाज सेवा समिति के सहसंयोजक शैलेश यादव द्वारा प्रसादी वितरण किया गया वहां से परिक्रमा कपिल मुनि आश्रम ,भागीरथ गुफा होते हुए चैतन्य महाप्रभु जी की बैठक के बाद अगला पढ़ाव काला गोरा भैरव बाबा मंदिर पर रहा वहां से पंचकोशीय परिक्रमा भगवान वराह मंदिर पर पूर्ण हुई| शूकर क्षेत्र पंचकोसी परिक्रमा समाज सेवा समिति सहसंयोजक अजय पाल सिंह बदन सिंह ने बताया – पंचकोशीय परिक्रमा में श्रद्धालु ॐ जय गंगे, ॐ जय वराह जय श्री गंगे मांई की जन्म जन्म सुखदाई की, ॐ नमो नारायण भगवते वासुदेवाय जाप कर झूम रहे थे यह परिक्रमा प्रत्येक एकादशी को आयोजित की जाती है, जिसमें श्रद्धालु भगवान विष्णु भगवान वाराह की कृपा और मोक्ष प्राप्ति के लिए पवित्र हर की पौड़ी श्री गंगा जी स्नान कर भगवान वराह का पूजन अर्चन करने के उपरांत श्री गंगा जी की परिक्रमा करते हुए सोरों शूकर क्षेत्र की पंचकोशीय परिक्रमा करते हैं | यह परिक्रमा भगवान विष्णु भगवान वाराह की परिक्रमा के रूप में जानी जाती है पंचकोशीय परिक्रमा में राजस्थान यूपी फर्रुखाबाद लखीमपुर खीरी ग्रेटर नोएडा आगरा बरेली टूंडला बदायूं उझानी दातागंज कछला बेरा नगरा कासगंज प्रहलादपुर नगला खांजी सहावर पटकियां तकुआवर सहित आसपास के ग्रामीणों से हजारों की संख्या में बुजुर्गों बच्चों सहित माताएं बहनों ने परिक्रमा में पुण्य लाभ अर्जित किया मुख्य रूप से अशोक कुमार पांडे, शशांक दीक्षित, गिरजा शंकर पाठक,आदित्य प्रताप सिंह, अजय पाल सिंह ,योगेश उपाध्याय, विनोद दीक्षित, लाखन सिंह, मुनेंद्र बघेल, शैलेश यादव, प्रदीप उपाध्याय, गीतम सिंह, राम भजन तिवारी, हिमांशु उपाध्याय, केतकी देवी, नीरज पचौरी, शैलेश यादव, आशीष भारद्वाज, अजय तिवारी, करण पाराशर , हरदयाल राजपूत, राधा कृष्ण विजय गोविंद गोपाल तिवारी, अर्जुन लाल गुप्ता,राजकुमार गौड, हरिओम पचौरी सहित हजारों श्रद्धालु परिक्रमा में उपस्थित रहे।

Author: Soron Live 24

