मोक्षदायिनी एकादशी पर लाखों श्रद्धालुओं ने हरि की पैड़ी में लगाई डुबकी

मोक्षदायिनी एकादशी पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई डुबकी
स्नान आदि से निवृत्त होकर श्रद्धालुओं ने की पूजा अर्चना

 

(हरि की पैड़ी वराह घाट पर स्नान करते श्रद्धालु स्थानीय लोग)
(फोटो रंग बिरंगी लाइटों से सजा वराह मंदिर सोरों)

(फोटो भगवान वराह मंदिर में दर्शन उमड़े श्रद्धालु)

सोरों/कासगंज। भगवान वराह की प्राकट्य स्थली सूकर क्षेत्र सोरों में मार्गशीर्ष माह के पहले महा स्नान पर्व मोक्षदायिनी एकादशी पर बुधवार को ठंड के बावजूद भी लाखों श्रद्धालुओं ने एक साथ गंगा में डुबकी लगाई। हरि की पौड़ी सहित लहरा और कछला गंगा घाट पर भी स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में थी। स्नान आदि से निवृत्त होकर श्रद्धालुओं ने गंगा घाट के किनारे स्थित माता मंदिरों में पूजा अर्चना की।
मार्गशीर्ष माह की मोक्षदायिनी एकादशी पर स्नान कर पुण्य कमाने के लिए श्रद्धालुओं के गंगा घाटों पर पहंुचने का सिलसिला बीते मंगलवार की दोपहर से ही शुरू हो गया था। सांय होने तक सभी धर्मशालाएं फुल हो चुकी थीं। ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर पुण्य कमाने के लिए श्रद्धालुओं ने खुले आसमान के नीचे ही अपना बिस्तर लगा लिया और सुबह पहले डुबकी लगाने को गंगा घाट पर पहंुच गए। बुधवार को सुबह से ही हर-हर गंगे के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने स्नान शुरू किया। कड़ाके की ठंड भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा न सकी। स्नान से निवृत्त होकर श्रद्धालु गंगा घाटों के किनारे स्थित मंदिरों में पहंुचे, यहंा पूजा अर्चना की और पुण्य कमाया। तीर्थ नगरी सोरों में स्नानार्थियों के साथ ही मेला देखने को जुटी भीड़ की वजह से लोगों की संख्या अधिक दिखाई दी। जबकि लहरा और कछला गंगा घाट पर भी स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में थी।
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मार्गशीर्ष मेले का श्रद्धालुओं ने उठाया लुत्फ
सोरों। मार्गशीर्ष माह में एकादशी से दो दिन पूर्व ही मेले का उद्घाटन हुआ है। एकादशी पर जुटने वाली भीड़ को स्नान से पूर्व रात गुजारने के लिए यह मेला एक साधन के रूप में पेश आता है। मंगलवार को पहंुचने वाले श्रद्धालुओं ने रात्रि में अपने लेटने का इंतजाम खोजने के बाद मेले का लुत्फ उठाना शुरू कर दिया। काफी संख्या में लोगों ने अपनी रात ही मार्गशीर्ष मेले में आईं दुकानों, झूलों, सर्कस, सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखकर गुजारी और सुबह स्नान से निवृत्त होकर गंतव्यों को रवाना हो गए।
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प्रसाद के रूप में मिलने वाली नारंगी भी खूब बिकी
सोरों। तीर्थ नगरी सोरों के मार्गशीर्ष मेले में ही नारंगी नाम का यह फल देखने को मिलता है। ठंड के मौसम में मिलने वाले इस फल की शनिवार को जमकर खरीददारी हुई। जिसकी वजह से नारंगी की दुकानें लगाने वाले लोग खासे खुश दिखाई दिए। लोगों की मानें तो यह फल सर्दी जुकाम को बढ़ावा देने में सहायक होता है, बच्चे एवं बुजुर्ग इस फल के सेवन से कतराते हैं, लेकिन वर्ष में एक बार ही मिलने वाले इस फल का लोग स्वाद अवश्य लेते हैं। एक पखवाड़े तक चलने वाले इस मेले के समाप्त होने के साथ ही इस फल की बिक्री बंद हो जाती है।

फोटो – मोक्षदायिनी एकादशी पर हरि की पौडी पर गंगा स्नान करते श्रद्वालुगण।

Soron Live 24
Author: Soron Live 24

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