पंचकोसी परिक्रमा समिति और ब्राह्मण कल्याण सभा ने गांव गांव में शुरू किया जागरूकता अभियान

 


कासगंज:शूकर क्षेत्र पंचकोसी परिक्रमा समाज सेवा समिति द्वारा  बुधवार को ग्राम नगला खजी में रामदयाल वर्मा की आवास पर देवोत्थान एकादशी एवं मोक्षदायिनी एकादशी की पंचकोशीय परिक्रमा के विषय पर बैठक का आयोजन किया गया ।बैठक की अध्यक्षता शरद कुमार पांडे संयोजक – शूकर क्षेत्र पंचकोसी परिक्रमा समाज सेवा समिति, संस्थापक / अध्यक्ष – ब्राह्मण कल्याण सभा द्वारा की गई। बैठक का संचालन चेतराम उर्फ नेक्शु प्रधान द्वारा किया गया। बैठक में संयोजक शरद कुमार पांडे ने आदितीर्थ शूकरक्षेत्र धाम, सोरों जी की पंचकोशी परिक्रमा के संबंध में प्रकाश डालते हुए कहा पृथ्वी के प्रथम उत्पत्ति स्थल आदितीर्थ शूकरक्षेत्र धाम, सोरों जी की सांस्कृतिक धरोहर को सहज रखने की हम सभी की जिम्मेदारी है हम सभी को मिलकर पूर्व की भांति गांव-गांव घर-घर जाकर प्रत्येक घर से हर व्यक्ति को सूकर क्षेत्र सोरों की पंचकोशीय परिक्रमा में प्रतिभाग करने के लिए जागरूक करना है। और अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं को एकत्रित होने का आग्रह करना है। प्रत्येक गांव में ग्राम संयोजक सहसंयोजक नियुक्त कर सभी को जिम्मेदारी कर्तव्य व्यवस्था के साथ धर्म प्रचार के लिए कहा | परिक्रमा समिति के सहसंयोजक शिवानंद उपाध्याय ने देवोत्थान एकादशी पंचकोशीय परिक्रमा के विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया – देवोत्थान एकादशी कार्तिक माह में आती है और कार्तिक माह का अपना धार्मिक महत्व है, क्योंकि यह पूरा महीना भगवान विष्णु को समर्पित है। इसी दिन, भगवान विष्णु चार महीने के बाद जागेंगे, जिसे चातुर्मास के रूप में जाना जाता है। देवउठनी एकादशी के दिन माता तुलसी का विवाह भी किया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन से भगवान विष्णु सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं। इस दिन से शुभ व मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। देवोत्थान एकादशी की शुभकामनाएं देते हुए मैथिल ब्राह्मण कल्याण सभा जिला अध्यक्ष राधे मोहन झा ने कहा – देवोत्थान एकादशी के इस पावन अवसर पर,भगवान विष्णु की कृपा से आपके जीवन में सुख-समृद्धि और आनंद की वर्षा हो,आपके परिवार में प्रेम और सौहार्द का आगमन हो, आपके घर में लक्ष्मी का वास हो। देवोत्थान एकादशी के दिन हर की पौड़ी श्री गंगा जी स्नान उपरांत दुग्ध अभिषेक करके भगवान वराह की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने पश्चात परिक्रमा प्रारंभ होगी एवं आपके जीवन में शुभता और मांगलिक कार्यक्रमों की शुरुआत एवं सुख और समृद्धि की वृद्धि होगी | परिक्रमा सहसंयोजक लाखन सिंह ने सभी श्रद्धालुओं से परिक्रमा में प्रतिभाग करने के लिए आग्रह करते हुए कहा- पंचकोशी परिक्रमा में आपकी सहभागिता से,आपके पापों का नाश हो, आपके जीवन में पवित्रता और शुद्धता का आगमन हो,आपके जीवन में भगवान विष्णु अवतार भगवान वाराह की कृपा बनी रहे | आप सभी भक्तजनों से अनुरोध है कि इस पावन अवसर पर पंचकोशी परिक्रमा में भाग लें और भगवान वराह की कृपा प्राप्त करें। शरद कुमार पांडे ने देवोत्थान एकादशी को लगने वाली पंचकोशीय परिक्रमा के बारे में बताते हुए कहा – आदितीर्थ शूकरक्षेत्र धाम, सोरों जी पंचकोशीय परिक्रमा हर की पौड़ी श्री गंगा जी मैं श्रद्धालुओं द्वारा स्नान करने के उपरांत भगवान वराह मंदिर से भगवान वराह का पूजन अर्चन करने के बाद प्रातः 8:00 बजे पंचकोसी प्रारंभ होगी | 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। साधक 12 नवंबर के दिन एकादशी का व्रत रख भगवान वाराह लक्ष्मी नारायण जी की पूजा कर सकते हैं। वहीं, एकादशी व्रत का पारण 13 नवंबर को सुबह 06 बजकर 42 मिनट से लेकर 08 बजकर 51 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं।
बैठक में मुख्य रूप से शरद कुमार पांडे, शिवानंद उपाध्याय, चेतराम, राधे मोहन झा, भारत कुमार शर्मा, मुन्नालाल, श्याम किशोर वर्मा, लेखराज, वासुदेव, लाखन सिंह, नेम सिंह, हुब्बलाल, श्रीपाल, सरवन, रामदयाल, खूब सिंह, शशिकांत, अर्जुन कुमार, राकेश कुमार, तेजपाल, ज्ञान सिंह, कुमरसेन, कीर्ति कुमारी, पुष्पा देवी, शांति देवी, हरमाया देवी, शीला देवी, पुष्पा देवी, शांति देवी सहित अनेक आस्थाबान माताएं बहने एवं श्रद्धालुजन उपस्थित रहे |

Soron Live 24
Author: Soron Live 24

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