सूकर क्षेत्र में जल, थल, अन्तरिक्ष तीनों में ही मिलती है मुक्ति ।
यूपी:

(फोटो सोरों हरि की पैड़ी गंगा घाट पर तर्पण करते लोग)
कासगंज जनपद तीर्थ सोरों में भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक हिन्दू अनुयायी अपने पितरों का श्रद्धा पूर्वक स्मरण करते हैं, और इनकी आत्म शान्ति व मोक्ष मुक्ति के लिए तीर्थ स्थानों पर जाकर पितृ तर्पण, श्राद्धकर्म,व पिण्डदान करते हैं। पितृपक्ष के दौरान कई राज्यों से लाखों की संख्या में यजमान अपने पितरों की आत्म शान्ति व मोक्ष मुक्ति कर्मकाण्ड प्रक्रिया के लिए सोरों जी आते हैं।
जहां भगवान विष्णु के तृतीय अवतार भगवान वराह का अवतरण व मोक्ष हुआ है।आगे चलकर यह तीर्थ सूकर क्षेत्र के नाम से विख्यात हुआ ।
मानव कलपर्यन्त से नरक में पड़े हैं, उनके पुत्र ,पौत्र व वंशंज यदि तर्पण, श्राद्ध , पिण्ड दान क्रिया कर दें तो उसके प्रभाव से उन आत्माओं को सद्गति मोक्ष मुक्ति मिल जाती है । हरि की पौड़ी के लड्डू वाले बालाजी के घाट पर आचार्य शशिधर द्विवेदी,प०प्राज्ञेश द्विवेदी,प०सक्षम द्विवेदी तर्पण कराते हैं।
आचार्य शशिधर द्विवेदी बताते हैं कि भगवन विष्णु के तृतीय अवतार भगवान वराह ने माया पृथ्वी से किये संवाद में सूकर क्षेत्र सोरों जी में होने वाले पितृ तर्पण श्राद्धकर्म की महत्ता का वर्णन किया है।वराह पुराण के अनुसार माता पृथ्वी से अपने संवाद में भगवान वराह कहते हैं कि- गयायाश्च थलेमुक्ति, वराणस्यां जले स्थले। जले स्थले च अन्तरिक्षे त्रिधामुक्ति शूकरे।।
जिसका अर्थ है – गया के थल में मुक्ति है , वाराणसी में जल और थल में , वहीं सूकर क्षेत्र में जल थल अन्तरिक्ष तीनों में ही मुक्ति मिलती है।
Author: Soron Live 24

