पंच कोशीय परिक्रमा:आदि तीर्थ शूकर क्षेत्र धाम, सोरों जी 2 जुलाई दिन मंगलवार ( कृष्ण पक्ष ) योगिनी एकादशी प्रातः 6:00 बजे भगवान वराह मंदिर हरकी पौड़ी श्री गंगा जी सूकर क्षेत्र सोरोंजी की

पंच कोशीय परिक्रमा प्रत्येक एकादशी को भगवान वाराह मंदिर प्रांगण से गंगा स्नान कर भगवान वराह का पूजन अर्चन करने के उपरांत प्रारंभ होती है
पंच कोशीय परिक्रमा इस बार 2 जुलाई 2024 दिन मंगलवार योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर प्रातः 6:00 बजे भगवान वराह मंदिर से हर की पौड़ी गंगा जी में स्नान करने के उपरांत भगवान वराह का पूजन करने के बाद प्रारंभ होगी
शूकर क्षेत्र पंचकोसी परिक्रमा समाज सेवा समिति आदि तीर्थ शूकर क्षेत्र धाम, सोरों जी संयोजक एवं ब्राह्मण कल्याण सभा संस्थापक अध्यक्ष शरद कुमार पांडे ने समस्त धर्म प्रेमी जनता जनार्दन से अपील की अधिक से अधिक संख्या में भगवान वराह मंदिर पर पहुंचकर सूकर क्षेत्र पंचकोशीय परिक्रमा में प्रतिभाग कर भगवान वराह का आशीर्वाद प्राप्त करें |
शरद कुमार पांडे ने बताया – सालभर में 24 एकादशी आती हैं, 12 शुक्ल पक्ष की और 12 कृष्ण पक्ष की और हर एकादशी का खास महत्व होता है. इस दिन व्रत करने के अलावा गंगा में स्नान करने और दान करने का विशेष महत्व होता है. इस बार योगिनी एकादशी का व्रत 2 जुलाई 2024, मंगलवार के दिन रखा जाएगा.
हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। उनमें आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं। आषाढ़ कृष्ण एकादशी का नाम योगिनी है। इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यह इस लोक में भोग और परलोक में मुक्ति देने वाली है। यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध है।
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 1 जुलाई, सोमवार की सुबह 10 बजकर 26 मिनिट से शुरू होगी, जो अगले दिन यानी 02 जुलाई, मंगलवार की सुबह 08 बजकर 42 मिनिट तक रहेगी। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 2 जुलाई को होगा, इसलिए इसी दिन ये व्रत किया जाएगा। व्रत का पारणा अगले दिन यानी 3 जुलाई, बुधवार को किया जाएगा।
इस दिन कईं शुभ योग भी बनेंगे, जिसके चलते ये व्रत और भी खास हो गया है
योगिनी एकादशी 2024 शुभ योग- 2 जुलाई, मंगलवार को सर्वार्थसिद्धि और त्रिपुष्कर नाम के 2 शुभ योग बन रहे हैं। सर्वार्थसिद्धि योग में किए गए सभी कार्यों में सफलता मिलती है और त्रिपुष्कर योग में किए गए उपाय, पूजा आदि का तीन गुना फल हमें प्राप्त होता है।
योगिनी एकादशी व्रत-पूजा विधि
– 2 जुलाई, मंगलवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में किसी साफ स्थान पर लकड़ी के बाजोट के ऊपर सफेद वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु भगवान वाराह की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
– सबसे पहले देव प्रतिमा पर कुंकुम से तिलक करें, फूलों की माला पहनाएं, शुद्ध घी का दीपक जलायें। इसके बाद एक-एक करके अबीर, गुलाल, कुंकुम, चावल, रोली आदि चीजें चढ़ाते रहें। पूजा करते समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप भी करते रहना चाहिए।
– पूजा के बाद भगवान विष्णु भगवान वाराह को अपनी इच्छा अनसुार, फल या मिठाई का भोग लगाएं, इसमें तुलसी के पत्ते जरूर डालें। पूजा के समाप्त होने पर भगवान विष्णु भगवान वाराह की आरती करें। अगले दिन द्वादशी तिथि (3 जुलाई, बुधवार) पर ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद व्रत का पारणा करें।
Author: Soron Live 24

