फेरी वाले गुरुजी की पहल से कासगंज में शिक्षा और खेल का नया सवेरा

फेरी वाले गुरुजी की पहल से कासगंज में शिक्षा और खेल का नया सवेरा

फेरी लगाकर शॉल बेचने से लेकर राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिताओं तक का सफर, बीमारी को दी मात; अब 3.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा देकर गरीब और मध्यमवर्गीय बच्चों के सपनों को दे रहे उड़ान

 

कासगंज। ( लेखक सचिन उपाध्याय)   कड़ाके की ठंड में पिता के साथ गांव-गांव फेरी लगाकर ऊनी शॉल बेचने वाला एक साधारण परिवार का बालक आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है। यह कहानी है सहावर तहसील क्षेत्र के ग्राम हीरापुर (खोजपुर) निवासी इंजीनियर बलवीर सिंह की, जिन्हें लोग प्यार से ‘फेरी वाले गुरुजी’ के नाम से जानते हैं। अभावों, संघर्ष, बीमारी और आर्थिक चुनौतियों को पीछे छोड़कर उन्होंने शिक्षा, खेल और समाजसेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।

बचपन में पिता नारायण सिंह के साथ पूर्वांचल के गांवों में ऊनी शॉल की फेरी लगाने के दौरान कई बार सड़क किनारे रात गुजारने वाले बलवीर सिंह ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई और खेल के प्रति अपना जुनून कायम रखा। कुश्ती के अखाड़े में उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वर्ष 2006 में कानपुर में आयोजित अखिल भारतीय कुश्ती चयन प्रतियोगिता, जो एसजीएफआई से मान्यता प्राप्त थी, में उन्होंने प्रथम स्थान हासिल कर स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा 52वीं नेशनल स्कूल गेम्स (अंडर-17) तथा वर्ष 2007 में भुवनेश्वर, ओडिशा में आयोजित 20वें राष्ट्रीय खेलकूद समारोह की 50 किलोग्राम कुश्ती प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया।

स्पॉन्सरशिप के अभाव में अधूरा रह गया खेल का सपना

उत्कृष्ट खेल प्रतिभा के बावजूद आर्थिक संसाधनों और उचित स्पॉन्सरशिप का अभाव उनके आगे बढ़ने की राह में बड़ी बाधा बना। खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना भले ही परिस्थितियों के कारण अधूरा रह गया, लेकिन बलवीर सिंह ने इसे अपनी हार नहीं बनने दिया। उन्होंने शिक्षा को अपना हथियार बनाया और सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के साथ बी.टेक की उपाधि हासिल की।

इसी संघर्षपूर्ण दौर में उन्हें गंभीर बीमारी ने घेर लिया। स्थिति इतनी कठिन थी कि चिकित्सकों ने भी जीवन की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति और हौसले के बल पर उन्होंने बीमारी को मात दी और जीवन को नई दिशा देने का संकल्प लिया।

मोबाइल के ‘जुगाड़’ से शुरू हुआ डिजिटल शिक्षा का सफर

बीमारी से उबरने के बाद सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच उन्होंने मोबाइल और साधारण डिजिटल सेटअप के सहारे ‘नारायणा कोचिंग क्लासेस’ के माध्यम से यूट्यूब पर पढ़ाना शुरू किया। शुरुआत भले ही बेहद सामान्य साधनों से हुई, लेकिन उनकी पढ़ाने की सरल शैली और कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाने की कला ने विद्यार्थियों के बीच उन्हें लोकप्रिय बना दिया।

आज उनके डिजिटल लेक्चर्स भारत के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ नेपाल और पाकिस्तान तक विद्यार्थी देखते हैं। उनके अनुसार अब तक 3.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों को उनके डिजिटल माध्यम से मार्गदर्शन मिल चुका है। उनके पढ़ाए अनेक विद्यार्थी देश के विभिन्न सरकारी विभागों में जूनियर इंजीनियर (जेई) और असिस्टेंट इंजीनियर (एई) के पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें कई विद्यार्थियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में ऑल इंडिया टॉप रैंक भी हासिल की है।

अब जन्मभूमि के बच्चों के लिए नि:शुल्क शिक्षा और खेल का संकल्प

जीवन के इस पड़ाव पर ‘फेरी वाले गुरुजी’ ने अपनी जन्मभूमि कासगंज के गरीब, वंचित और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा और खेल का नया अध्याय शुरू करने का संकल्प लिया है।

उनका उद्देश्य है कि आर्थिक तंगी या संसाधनों के अभाव में किसी प्रतिभाशाली बच्चे का सपना अधूरा न रह जाए। इसी उद्देश्य से वे अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से पॉलिटेक्निक और बी.टेक सिविल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में पूरी तरह नि:शुल्क डिजिटल शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं।

इसके साथ ही युवाओं को करियर काउंसलिंग, खेल प्रोत्साहन और प्रेरक सत्रों के माध्यम से सही दिशा देने का प्रयास भी किया जा रहा है। उनका मानना है कि ग्रामीण और छोटे शहरों की प्रतिभाओं को यदि सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिल जाएं तो वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

‘अध्यापन मेरा पैशन, बच्चों का भविष्य मेरा संकल्प’

विभिन्न सामाजिक मंचों पर सम्मानित हो चुके इंजीनियर बलवीर सिंह का कहना है कि अध्यापन उनका मुख्य ध्येय और पैशन है। उनका सपना है कि कासगंज की मिट्टी में पलने वाले प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और खेल के बेहतर अवसर मिलें, ताकि वे आर्थिक परिस्थितियों की वजह से पीछे न रह जाएं।

बलवीर सिंह का कहना है कि अब उनके जीवन का उद्देश्य अपनी जन्मभूमि के युवाओं को ज्ञान, मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें देश की मुख्यधारा से जोड़ना है।

‘फेरी वाले गुरुजी’ की इस पहल को लेकर कासगंज के युवाओं और अभिभावकों में भी उत्साह है। लोगों का कहना है कि अभावों से निकलकर सफलता की मिसाल बने बलवीर सिंह का संघर्ष और अब समाज के लिए किया जा रहा उनका प्रयास निश्चित रूप से क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

Soron Live 24
Author: Soron Live 24

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *