श्रीराम कथा!सुमंत के लौटने से लेकर दशरथ मरण तक की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

श्रीराम के वनगमन का वियोग सह नहीं सके राजा दशरथ, कथा वाचक पंडित नितिन पचौरी ने सुनाया मार्मिक प्रसंग; सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने किया कथा श्रवण
(तीर्थ नगरी सोरों (शूकर क्षेत्र)। सचिन उपाध्याय)तीर्थ नगरी सोरों शूकर क्षेत्र में आयोजित श्रीराम कथा के सातवें दिन भगवान श्रीराम के वनगमन के बाद अयोध्या में उत्पन्न हुए करुणामय वातावरण तथा राजा दशरथ के मरण का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया। कथा वाचक पंडित नितिन पचौरी ने श्रद्धालुओं को श्रीराम के वन जाने के बाद अयोध्या में व्याप्त शोक, मंत्री सुमंत के वापस लौटने और राजा दशरथ की विरह वेदना का भावपूर्ण वर्णन सुनाया।
कथा का वर्णन करते हुए पंडित नितिन पचौरी ने बताया कि जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वन के लिए प्रस्थान कर गए तो अयोध्या नगरी का वातावरण पूरी तरह बदल गया। जिस अयोध्या में चारों ओर उत्सव और प्रसन्नता का माहौल था, वहीं श्रीराम के वनगमन के बाद चारों ओर शोक और सन्नाटा छा गया। मंत्री सुमंत भगवान श्रीराम को वन की ओर छोड़कर जब अयोध्या लौटे तो उनके पास श्रीराम के बिना लौटने की पीड़ा थी।
सुमंत ने जब राजा दशरथ को श्रीराम का संदेश सुनाया तो पुत्र वियोग में व्याकुल राजा दशरथ की पीड़ा और बढ़ गई। श्रीराम के प्रति उनका प्रेम और पुत्र वियोग की वेदना कथा के इस प्रसंग में अत्यंत मार्मिक रूप से सामने आई। कथा वाचक ने बताया कि राजा दशरथ बार-बार श्रीराम को याद करते रहे और अंततः पुत्र वियोग का दुख सहन नहीं कर सके।
*दशरथ मरण का प्रसंग सुनकर भावुक हुए श्रोतागण*
राजा दशरथ के अंतिम समय का वर्णन सुनकर कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे। अनेक महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथा वाचक ने कहा कि श्रीराम के वनगमन का प्रसंग केवल एक पारिवारिक घटना नहीं, बल्कि त्याग, धर्म, आज्ञापालन और प्रेम की अद्भुत मिसाल है। भगवान श्रीराम ने पिता के वचन की मर्यादा रखने के लिए राजपाट का त्याग कर वनवास स्वीकार किया।
श्रीराम कथा के दौरान कथा वाचक पंडित नितिन पचौरी ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि श्रीराम का चरित्र हमें माता-पिता की आज्ञा का सम्मान करने, सत्य के मार्ग पर चलने और परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, धर्म एवं मर्यादा का पालन करने की प्रेरणा देता है।
कथा स्थल पर सैकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने एकाग्रचित्त होकर श्रीराम कथा का श्रवण किया। दशरथ मरण के मार्मिक प्रसंग के दौरान कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जयकारे लगाते नजर आए। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने श्रीराम कथा श्रवण का पूर्ण लाभ अर्जित किया।
Author: Soron Live 24

