फुटपाथ पर पहला हक पैदल चलने वालों का, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को दिए निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथ को पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुगम बनाने को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि फुटपाथ मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा है और सड़कों पर पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित एवं स्पष्ट रूप से चिन्हित स्थान होना जरूरी है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को केंद्र के निर्देशों के पालन को लेकर जवाब देने को कहा है।
सोमवार को जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि जहां सड़क है, वहां पैदल यात्रियों के लिए अलग और स्पष्ट स्थान होना चाहिए। फुटपाथ पर किसी तरह का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए और उसे वाहन मार्ग से सुरक्षित तरीके से अलग किया जाना चाहिए, ताकि लोग बिना डर के पैदल चल सकें।
स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी तय
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फुटपाथ के निर्माण, सीमांकन और रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निकायों, शहरी विकास प्राधिकरणों और पंचायतों की है। इन संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि फुटपाथ अतिक्रमण से मुक्त रहें और पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध हो।
कोर्ट के मुताबिक, फुटपाथ के अधिकार का उल्लंघन होने पर नागरिक संवैधानिक और कानूनी उपायों का सहारा लेने के साथ-साथ मुआवजे की मांग भी कर सकते हैं।
मौलिक अधिकार का हिस्सा है फुटपाथ पर चलना
सुप्रीम कोर्ट ने 19 जून के अपने फैसले का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा था कि चिन्हित फुटपाथ पर चलना नागरिक का मौलिक अधिकार है। यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) के तहत आवागमन के अधिकार और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है।
शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फुटपाथ पर पैदल चलने वालों का अधिकार मोटर वाहनों की आवाजाही के अधिकार से ऊपर है। ऐसे में फुटपाथों को सुरक्षित, अतिक्रमण मुक्त और पैदल यात्रियों के लिए उपयोगी बनाए रखना स्थानीय प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
Author: Soron Live 24

