राम जन्म प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, भजनों पर झूम उठा वराह मंदिर
नारद मोह और प्रभु श्रीराम के दिव्य अवतार का कथा व्यास पं. चाकर जी महाराज ने किया भावपूर्ण वर्णन

सोरों। सनातन तीर्थ नगरी हरि की पौड़ी स्थित श्री वराह मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस पर भगवान श्रीराम जन्मोत्सव का प्रसंग सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा व्यास पंडित चाकर जी महाराज ने नारद मोह, मनु-शतरूपा तपस्या तथा प्रभु श्रीराम के दिव्य जन्म की कथा का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया।
कथा के दौरान पं. चाकर जी महाराज ने कहा कि जब व्यक्ति के भीतर अहंकार आ जाता है तो भगवान उसकी परीक्षा लेने के लिए अपनी माया का चक्र चलाते हैं। उन्होंने कहा कि अहंकार बड़े-बड़े ज्ञानी और तपस्वियों का भी विवेक हर लेता है, इसलिए मनुष्य को कभी अपनी उपलब्धियों पर घमंड नहीं करना चाहिए। नारद मोह प्रसंग का विस्तार से वर्णन सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
कथा व्यास ने भगवान श्रीराम के जन्म का अलौकिक वर्णन करते हुए कहा कि जैसे ही प्रभु का अवतार हुआ, पूरी अयोध्या नगरी आनंद में डूब गई। देवताओं ने आकाश से पुष्प वर्षा की, गंधर्व गान करने लगे और शीतल मंद सुगंधित पवन बहने लगी। राजा दशरथ ने अपने ज्येष्ठ पुत्र के जन्म की खुशी में ब्राह्मणों, भिक्षुओं और याचकों को सोना, वस्त्र और गायों का दान दिया तथा पूरी अयोध्या को ध्वज पताकाओं से सजाया गया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का अवतार केवल रावण वध के लिए नहीं, बल्कि संसार को आदर्श जीवन और मर्यादा का संदेश देने के लिए हुआ था। उनका जीवन हमें धर्म, धैर्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कथा के दौरान पं. चाकर जी महाराज द्वारा गाए गए भजन “भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी”, “बधैया बाजे आंगने में” एवं “ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैजनिया” सुन श्रद्धालु झूम उठे। पूरा मंदिर परिसर राममय हो गया और श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर नृत्य करने लगे।
कथा के विश्राम के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर नीरज भारद्वाज, डॉ. राजीव बरबारिया, मिलन मिश्रा, हार्दिक गौड़, उत्कर्ष उपाध्याय, सागर सनातनी, गणेश यादव, गौरव, शुभम दुबे, सोनू गोस्वामी, कुलदीप पंडित, मोहन बाबू तिवारी, प्रमोद भारद्वाज सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
Author: Soron Live 24

