सती प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा वराह मंदिर परिसर
श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथावाचक राघव चाकर ने सुनाया मर्यादा, सम्मान और समर्पण का संदेश

सोरोंजी। (सचिन उपाध्याय/रवि श्रोतीय)तीर्थनगरी के वराह मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा के दूसरे दिवस कथावाचक ने सती प्रसंग की मार्मिक कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान मंदिर परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
कथा व्यास ने सती प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल पौराणिक कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन के आदर्शों को स्थापित करने वाला प्रसंग है, जो प्रेम, समर्पण, मर्यादा और सम्मान का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि जहां मान-सम्मान न हो, वहां जाना उचित नहीं होता। इस प्रसंग के माध्यम से संबंधों में मर्यादा और आत्मसम्मान का महत्व बताया गया है।
कथावाचक ने बताया कि प्रजापति दक्ष ने भव्य यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया गया। भगवान शिव ने माता सती को बिना निमंत्रण यज्ञ में न जाने की सलाह देते हुए कहा—
“बिनु बोलाय जाहु जो होई।
तौ न भलाई कतहूं कोई।।”
इसके बावजूद पितृमोह में माता सती यज्ञ स्थल पहुंच गईं, जहां न तो भगवान शिव के लिए कोई स्थान आरक्षित था और न ही उनका सम्मान किया गया। उल्टा प्रजापति दक्ष ने सभा में भगवान शिव का अपमान किया। अपने आराध्य और पति का अपमान सहन न कर पाने पर माता सती ने यज्ञ की अग्नि में योगनिद्रा के माध्यम से अपने प्राण त्याग दिए।
कथा के दौरान बीच-बीच में प्रस्तुत किए गए भक्तिमय भजनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालु पूरे समय भक्ति रस में डूबे नजर आए। कथा में बताया गया कि बुधवार को शिव विवाह प्रसंग धूमधाम से सुनाया जाएगा।
इस अवसर पर आचार्य नरेश त्रिगुणायत, डॉ. राजीव बरबारिया, अशोक तिवारी, सागर भाई सनातनी, गनेश यादव ‘गौरव’, प्रज्ञेश द्विवेदी, हार्दिक गौर, कुलदीप पंडित, सोनू गोस्वामी, रवि गोस्वामी, उत्कर्ष उपाध्याय, देवांश शर्मा सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
Author: Soron Live 24

