कासगंज जिले में शिक्षा के नाम पर धोखे’ की बंपर सेल-भूपेश शर्मा
कक्षा 5 की मान्यता पर खोल दी 12वीं की दुकान
न U-DISE कोड, न फायर NOC; माफिया ने दांव पर लगाया हजारों बच्चों का भविष्य,

कासगंज । उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को ठेंगा दिखाते हुए कासगंज जनपद में एक बहुत बड़े ‘शिक्षा माफिया सिंडिकेट’ का खौफनाक चेहरा सामने आया है। जनपद के विभिन्न ब्लॉकों, कस्बों और ग्रामीण अंचलों में खुलेआम ऐसे सैकड़ों अवैध स्कूल संचालित हैं, जो न केवल भारत सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि मासूम बच्चों के भविष्य के साथ संगठित धोखाधड़ी कर रहे हैं।
इस महाघोटाले का पर्दाफाश करते हुए ‘अखण्ड आर्यावर्त निर्माण संघ’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेश शर्मा ने जिला प्रशासन को एक ‘अंतिम विधिक चेतावनी पत्र’ थमाकर पूरे महकमे की नींद उड़ा दी है। पत्र में साफ कहा गया है कि अगर 7 दिनों के भीतर इन फर्जी दुकानों को सील नहीं किया गया, तो कासगंज की सड़कों से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक ऐसा महासंग्राम होगा, जिसकी जिम्मेदारी सीधे जिला प्रशासन की होगी
इस दौरान भूपेश शर्मा ने बताया कासगंज के ग्रामीण इलाकों का सबसे कड़वा सच यह है कि सैकड़ों निजी स्कूलों के पास मान्यता केवल प्राथमिक (कक्षा 1-5) या जूनियर (कक्षा 6-8) तक की है। लेकिन बिना किसी कानूनी डर के ये स्कूल हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) तक की कक्षाएं धड़ल्ले से चला रहे हैं। यह सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 और RTE Act 2009 का खुला मर्डर है बिना वैध मान्यता और बिना U-DISE (यू-डाइस) कोड के चल रही इन उच्च कक्षाओं के कारण हजारों छात्रों का Permanent Education Number (PEN) जेनरेट ही नहीं हो पा रहा है। इसका मतलब यह है कि राष्ट्रीय शिक्षा पोर्टल पर इन बच्चों का शैक्षणिक डेटा पूरी तरह ‘शून्य’ है। कागजों में इन बच्चों का कोई वजूद ही नहीं है और इनका भविष्य पूरी तरह अंधकार में धकेला जा चुका है। एडमिशन के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूलने के बाद, परीक्षा के समय ये माफिया बच्चों का भविष्य दांव पर लगा देते हैं। इसके बाद किसी अन्य मान्यता प्राप्त ‘डिफाल्टर’ स्कूल से सेटिंग करके बैक-डोर (चोर दरवाजे) से परीक्षा फॉर्म भरवाए जाते हैं। इस पूरे रैकेट की जानकारी स्थानीय शिक्षा विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों को होने के बावजूद, ‘मलाई’ के बदले उन्हें मौन स्वीकृति मिली हुई है। इन अवैध संस्थानों में सुरक्षा मानकों की जो धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, वो किसी भी दिन बड़े हादसे को दावत दे सकती हैं। न तो स्कूल भवनों के पास फायर सेफ्टी NOC है, न बिल्डिंग फिटनेस सर्टिफिकेट है, और न ही स्कूली वाहनों का कोई वैध पंजीकरण (कमर्शियल रजिस्ट्रेशन) है।
टास्क फोर्स का तुरंत गठन: सभी ब्लॉकों में SDM और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर ताबड़तोड़ औचक निरीक्षण शुरू हो।
तत्काल तालाबंदी और FIR: स्वीकृत कक्षा से ऊपर दुकान चलाने वाले संस्थानों को तुरंत सील किया जाए और प्रबंधकों के खिलाफ नए कानून (भारतीय न्याय संहिता, 2023) की गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज हो।
मूल मान्यता का खात्मा: जो स्कूल धोखाधड़ी में शामिल हैं, उनकी पुरानी (मूल) मान्यता भी तत्काल प्रभाव से निरस्त की जाए।पब्लिक ‘ब्लैक लिस्ट’:** जनता को ठगी से बचाने के लिए ऐसे सभी फर्जी और डिफाल्टर स्कूलों की सूची समाचार पत्रों और सरकारी पोर्टलों पर सार्वजनिक की जाए।
इस पत्र की प्रतिलिपियां सीधे **माननीय मुख्यमंत्री आवास (कालिदास मार्ग, लखनऊ), माननीय शिक्षा मंत्री, प्रमुख सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा), महानिदेशक स्कूल शिक्षा (DGSE) लखनऊ, और अलीगढ़ मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक को भेजी गई हैं। इसके बाद से कासगंज के DIOS और BSA कार्यालयों में फाइलों को ठिकाने लगाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
“यह साधारण पत्र नहीं, सीधे कानूनी चेतावनी है…
“यह जनपद के जागरूक नागरिकों और अभिभावकों की ओर से एक विधिक चेतावनी है। यदि इस अत्यंत गंभीर विषय पर आगामी 7 दिनों के भीतर धरातल पर सीलिंग और FIR की ठोस कार्रवाई नहीं दिखाई दी, तो हमें जनहित को सर्वोपरि रखते हुए धरना आंदोलन व माननीय उच्च न्यायालय की शरण में जाने के लिए विवश होना पड़ेगा।
Author: Soron Live 24

