2026 में ‘सुपर एल नीनो’ का खतरा, दुनिया फिर बड़े जलवायु संकट के मुहाने पर वैज्ञानिकों की चेतावनी—150 साल पहले जैसी तबाही दोहराने की आशंका, भारत में कमजोर पड़ सकता है मानसून

2026 में ‘सुपर एल नीनो’ का खतरा, दुनिया फिर बड़े जलवायु संकट के मुहाने पर

वैज्ञानिकों की चेतावनी—150 साल पहले जैसी तबाही दोहराने की आशंका, भारत में कमजोर पड़ सकता है मानसून


दुनिया एक बार फिर गंभीर जलवायु संकट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि वर्ष 2026 में ‘सुपर एल नीनो’ विकसित हो सकता है, जो वैश्विक स्तर पर भारी तबाही का कारण बन सकता है। यह वही मौसमीय पैटर्न है जिसने 1877-78 में विनाशकारी प्रभाव डाला था, जिसके चलते अकाल, सूखा और लाखों लोगों की मौत हुई थी।
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेजी से बढ़ते समुद्री तापमान और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बीच इस बार एल नीनो के और अधिक शक्तिशाली होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ‘सुपर एल नीनो’ के रूप में विकसित होता है, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।
एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इसके कारण दुनिया भर के मौसम पैटर्न में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। कहीं सूखा पड़ता है तो कहीं अत्यधिक बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियां बन जाती हैं।
भारत के संदर्भ में यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। एल नीनो के प्रभाव से मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे बारिश में कमी आ सकती है और तापमान तेजी से बढ़ सकता है। इसका सीधा असर कृषि, जल संसाधनों और आम जनजीवन पर पड़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों ने सरकारों और वैश्विक संगठनों को पहले से तैयार रहने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की सलाह दी है। आने वाला समय यह तय करेगा कि दुनिया इस संभावित संकट का सामना कितनी मजबूती से कर पाती है।

Soron Live 24
Author: Soron Live 24

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