वरूथनी एकादशी पर सोरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, पंचकोशी परिक्रमा में हजारों श्रद्धालु शामिल

वरूथनी एकादशी पर सोरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, पंचकोशी परिक्रमा में हजारों श्रद्धालु शामिल

सोरों (कासगंज)।बैसाख मास की पावन वरूथनी एकादशी के अवसर पर शूकरक्षेत्र धाम सोरों जी में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का भव्य संगम देखने को मिला। प्रातःकाल से ही देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने हरि की पौड़ी स्थित पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर भगवान वराह का विधिवत पूजन-अर्चन किया और पंचकोशी परिक्रमा का शुभारंभ किया।
परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन करते हुए पूरे उत्साह और भक्तिभाव के साथ आगे बढ़ते रहे, जिससे सम्पूर्ण क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। इस धार्मिक आयोजन में गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित उत्तर प्रदेश के कानपुर, हाथरस, आगरा, एटा, मैनपुरी, बदायूं आदि जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
पंचकोशी परिक्रमा मार्ग में श्रद्धालुओं ने वराह गौशाला, चक्रतीर्थ, सूर्यकुण्ड, चन्द्रकुण्ड, जयादेवी भद्रकाली मंदिर, बटुक भैरव मंदिर, प्राचीन गृद्धवट, ग्राम देवी मंदिर, सीताराम मंदिर, तुलसीदास जन्मस्थान मंदिर, चौरासी घंटे वाली मैया एवं बाछरु महाराज सहित विभिन्न पवित्र स्थलों के दर्शन किए। मार्ग में जगह-जगह प्रसाद वितरण और विश्राम की उत्तम व्यवस्था रही। सीता रसोई, ममता देवी भवन (प्रेम जी की बगीची) एवं अन्य स्थानों पर समाजसेवियों द्वारा सेवा कार्य किए गए।
परिक्रमा पूर्ण करने के उपरांत श्रद्धालु करुआ देव महाराज, भगीरथ गुफा, कपिल मुनि आश्रम, वनखंडेश्वर महादेव मंदिर और चैतन्य महाप्रभु की बैठक के दर्शन करते हुए पुनः वराह मंदिर पहुंचे।
ब्राह्मण कल्याण सभा के संस्थापक अध्यक्ष एवं शूकरक्षेत्र समाज सेवा समिति के संयोजक शरद कुमार पाण्डेय ने बताया कि वरूथनी एकादशी भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत है। इस दिन गंगा स्नान, पंचकोशी परिक्रमा और भगवान वराह की पूजा करने से व्यक्ति को सौभाग्य, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मान्यता और महत्व:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरूथनी एकादशी का व्रत करने से 10,000 वर्षों की तपस्या के समान फल प्राप्त होता है। यह व्रत व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात पापों का नाश कर उसे विष्णु लोक में स्थान दिलाने वाला माना गया है। इस दिन अन्नदान, भूमिदान और विद्यादान का विशेष महत्व बताया गया है।
श्रद्धालुओं के अनुसार, इस पावन अवसर पर की गई पूजा-अर्चना और सेवा कार्य जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं।

Soron Live 24
Author: Soron Live 24

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