जया एकादशी पर शूकरक्षेत्र धाम में पंचकोशीय परिक्रमा, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

कासगंज माघ मास शुक्ल पक्ष की पावन जया एकादशी के अवसर पर गुरुवार को भगवान वराह के शूकरक्षेत्र धाम सोरों जी में पंचकोशीय परिक्रमा का भव्य एवं श्रद्धामय आयोजन किया गया। परिक्रमा का शुभारंभ प्रातः 9:30 बजे हर की पौड़ी स्थित श्री गंगा जी में स्नान के उपरांत भगवान वराह की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ।
यह धार्मिक यात्रा ब्राह्मण कल्याण सभा के संस्थापक अध्यक्ष एवं शूकरक्षेत्र समाज सेवा समिति के संयोजक श्री शरद कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में प्रारंभ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजसेवी, धर्मप्रेमी नागरिकों सहित मातृशक्ति ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं ने “जय वराह”, “जय गंगा”, “धर्म की जय हो” जैसे जयघोषों के साथ पंचकोशी मार्ग की परिक्रमा कर क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत रूप प्रदान किया। पूरा वातावरण भक्तिमय और अनुशासित रहा।
इस अवसर पर शरद कुमार पाण्डेय ने कहा कि भगवान वराह सनातन धर्म में पृथ्वी उद्धार और धर्म रक्षा के प्रतीक हैं। जया एकादशी के दिन पंचकोशीय परिक्रमा करने से आत्मशुद्धि के साथ-साथ समाज में नैतिकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रसार होता है। शूकरक्षेत्र धाम की गौरवशाली परंपरा को संरक्षित और प्रचारित करना हम सभी का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि ऐसी धार्मिक यात्राएँ समाज को जोड़ने, युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने तथा राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने का कार्य करती हैं। सनातन धर्म की अक्षय परंपरा में कुछ तीर्थ ऐसे हैं, जिनका माहात्म्य केवल ग्रंथों में वर्णित नहीं, बल्कि स्वयं उनकी धरा, जल, वायु और कण-कण में जीवंत अनुभूति के रूप में प्रवाहित होता है। तीर्थराज शूकरक्षेत्र (सोरों जी) ऐसा ही एक दिव्य, प्राचीन और महापुण्यशाली धाम है, जहाँ श्री हरि भगवान वराह की करुणा, माँ गंगा की निर्मल धारा और भक्तों की अखंड श्रद्धा एक साथ साक्षात् अनुभव होती है। शास्त्र स्पष्ट उद्घोष करते हैं—षष्टिवर्षसहस्त्राणि योगाभ्यासेन यत्फलम्। सौकरे विधिवत्स्नात्वा पूजयित्वा हरिं शुचिः॥
सप्तजन्मकृतं पापं तत्क्षणादेव नश्यति।
तीर्थराजं महापुण्यं सर्वतीर्थनिषेवितम्॥
अर्थात— साठ हजार वर्षों के योगाभ्यास से जो फल प्राप्त होता है, वही फल शुद्ध भाव से सूकरक्षेत्र में गंगा-स्नान कर, श्री हरि वराह का विधिपूर्वक पूजन करने से सहज ही प्राप्त हो जाता है। यहाँ स्नान मात्र से ही मनुष्य के पूर्व सात जन्मों के पाप तत्क्षण नष्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि शूकरक्षेत्र को तीर्थराज कहा गया है—अन्य सभी तीर्थ भी मानो इसकी सेवा में नतमस्तक हैं। परिक्रमा के समापन पर सर्वजन कल्याण, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्र की उन्नति के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई। मान्यता है कि विधिवत गंगा स्नान, हरि-पूजन और पंचकोशी परिक्रमा से जन्म-जन्मांतर के दोष क्षीण होते हैं तथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थ सिद्ध होते हैं। श्रद्धालुओं ने हरि की पौड़ी श्री गंगा जी की परिक्रमा करते हुए सूर्यकुंड, दूधेश्वर महादेव, साध्वी रत्नावली समाधि स्थल, बटुक भैरव मंदिर, जयदेवी पीठ, सीताराम मंदिर, तुलसीदास जन्मस्थान, माँ 84 घंटे वाली, बाछरू महाराज स्थल, सीता रसोई, प्रेमजी की बगीची ममता देवी भवन, सिंगल वाले महाराज, करुआ देव महाराज, बनखंडेश्वर महादेव, भागीरथ गुफा, कपिल मुनि आश्रम, चैतन्य महाप्रभु की बैठक तथा काला–गोरा भैरव बाबा मंदिर जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन किए। परिक्रमा का समापन भगवान वराह मंदिर पर हुआ। शूकरक्षेत्र समाज सेवा समिति सह संयोजकशिवानंद उपाध्याय, शशांक दीक्षित ने बताया – पूरे परिक्रमा मार्ग में प्रसाद एवं जलपान की समुचित व्यवस्था रही। वराह गौशाला चक्रतीर्थ , वाक्षरु महाराज,सीता रसोई, ममता देवी भवन, सिग्नल वाले महाराज तथा बाछरू तीर्थ, भागीरथ गुफा सहित विभिन्न स्थलों पर स्थानीय भक्तों द्वारा श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई। सेवा कार्य में कल्लू दादा , शैलेन्द्र तिवारी मैनपुरी, जयप्रकाश त्रिवेदी, रामदर्शन महेरे, पूरन श्रीवास्तव, ओमप्रकाश मौर्य, जीतेन्द्र दिक्षित,नीरज तिवारी, मोना तिवारी, श्याम बड़गैयां, अनुपम शर्मा, रत्नेश माहेश्वरी, प्रवीण गुप्ता, सौरभ दीक्षित, मुन्नालाल बड़गैयां, गिरीश पाठक, अमरदीप वार्ष्णेय, अशोक धमनावत, अवधेश दीक्षित सहित अनेक सेवाभावियों ने देव स्थलों पर केला, पैठे की मिठाई, गन्ने का रस, साबू दाने की खीर, चाय , आलू, तिल खोए के लड्डू से भोग लगाकर प्रसादी व्यवस्था की सराहनीय भूमिका रही।
परिक्रमा में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिनमें शिवानंद उपाध्याय,, शशांक दीक्षित, प्रवीण कुमार द्विवेदी (एटा), गिरजाशंकर पाठक, राधाकृष्ण विजय, राजकुमार गौड़, अशोक कुमार पांडेय, गीतम सिंह, रामू तिवारी, जयप्रकाश त्रिवेदी, श्याम बिहारी दीक्षित, खूब सिंह, ईश्वरी प्रसाद, हरीश बाबू, सतीश चन्द्र (दरुआपुर), राधेश्याम (दरुआपुर), प्रदीप उपाध्याय, जितेन्द्र पाल सिंह, शैलेन्द्र तिवारी मैनपुरी,सचिन गुप्ता, रामानन्द गुप्ता (गंजडुंडवारा), भगवान सिंह, अनुराग गुप्ता, राधे मोहन झा, अवधेश अग्रवाल कासगंज सहित असंख्य भक्तजन शामिल रहे।
अंत में आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं, सेवाभावियों एवं स्थानीय नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आगामी एकादशियों पर भी पंचकोशी परिक्रमा में सहभागिता का आह्वान किया ।
Author: Soron Live 24

