रमा एकादशी पर सोरों जी में उमड़ा श्रद्धा का सागर, हजारों श्रद्धालुओं ने की पंचकोशी परिक्रमा

भक्ति, सेवा और आस्था का हुआ अनूठा संगम – व्रत से मिलता है मोक्ष व विष्णु कृपा : शरद पांडेय
सोरों (कासगंज),पावन रमा एकादशी के अवसर पर शुक्रवार को शूकरक्षेत्र धाम सोरों जी में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ हरकी पौड़ी गंगा तट पर उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने गंगा में पुण्य स्नान कर भगवान वराह का पूजन-अर्चन किया और इसके बाद पारंपरिक पंचकोशी परिक्रमा का शुभारंभ हुआ।
परिक्रमा का आरंभ सुबह 8 बजे शूकर क्षेत्र समाज सेवा समिति के संयोजक एवं ब्राह्मण कल्याण सभा के संस्थापक अध्यक्ष शरद कुमार पांडेय के नेतृत्व में किया गया। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद पारंपरिक मार्ग से परिक्रमा प्रारंभ की। इस दौरान श्रद्धालु सूर्यकुंड, दूधेश्वर, साध्वी रत्नावली समाधि स्थल, बटुक भैरव मंदिर, जयदेवी पीठ, तुलसीदास जन्मस्थान मंदिर, 84 घंटे वाली मां, बनखंडेश्वर महादेव, कपिल मुनि आश्रम, चैतन्य महाप्रभु बैठक सहित अन्य पवित्र स्थलों के दर्शन करते हुए भगवान वराह मंदिर पर पहुंचे, जहां परिक्रमा का समापन हुआ।
पूरे मार्ग में श्रद्धालु “ॐ जय गंगे”, “ॐ जय वराह” का संकीर्तन करते हुए भक्ति में लीन रहे। परिक्रमा मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर प्रसाद एवं जलपान की व्यवस्था की गई थी। सीता रसोई पर पूरन श्रीवास्तव मुस्कान, ओमप्रकाश मौर्य अध्यापक, नीरज तिवारी, ममता देवी भवन पर गंगा वराह महासभा अध्यक्ष सुनील तिवारी, दीपक भारद्वाज, प्राचीन बाछरू तीर्थ (वत्सासुर वध स्थल) पर समिति सह संयोजक वीरेन्द्र सिंह, बदन सिंह ग्राम गुंदरागंज सहित अनेक सेवाभावी लोगों ने प्रसाद वितरण किया।
शरद कुमार पांडेय ने कहा कि “रमा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाला और पापों से मुक्ति देने वाला है। पंचकोशी परिक्रमा करने से भक्तों को पुण्य, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।”
उन्होंने बताया कि सोरों क्षेत्र का प्राचीन बाछरू तीर्थ (वत्सासुर वध स्थल) अत्यंत पवित्र एवं ऐतिहासिक स्थान है। यह वही स्थल है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण अपने भाई बलराम व सखाओं के साथ गाय-बछड़ों को चराने आते थे और यहीं पर उन्होंने वत्सासुर राक्षस का वध किया था। इस कारण यह स्थान “बाछरू तीर्थ” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
यह पावन स्थल ब्रज क्षेत्र के सोरों में स्थित है, जहाँ कनक सारोवर, सहस्त्रकुंड, रामकुंड, अड़वारो कुंड, रावरी कुंड, सूर्यकुंड जैसे पवित्र सरोवर हैं। रामकुंड पर माखनचोर मंदिर और रावरी कुंड पर वत्स बिहारा मंदिर स्थित हैं। कहा जाता है कि यही वह स्थान है, जहाँ गर्ग संहिता और सूरसागर में वर्णित श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ घटित हुई थीं।
शरद पांडेय ने यह भी बताया कि प्रशासन द्वारा अब बाछरू तीर्थ के सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार के कार्य कराए जा रहे हैं, जिससे यह तीर्थस्थल भक्तों के लिए और अधिक आकर्षक बन सकेगा।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिनमें शरद कुमार पांडेय, शिवानंद उपाध्याय, विनोद दीक्षित, प्रवीण कुमार द्विवेदी (एटा), अर्जुन लाल गुप्ता, शशांक दीक्षित, गिरजाशंकर पाठक, धर्मेंद्र चतुर्वेदी, राधाकृष्ण विजय, राजकुमार गौड़, अशोक कुमार पांडेय, बदन सिंह, खूब सिंह, ईश्वरी प्रसाद, हरीश बाबू दरुआपुर, सतीश चन्द्र दरुआपुर, राधेश्याम दरुआपुर, गंगाराम रामनगर, इतवारीलाल, हाकिम सिंह, मुकेश रावत (किरावली), चंचल जी (कासगंज), प्रदीप उपाध्याय, अनुपम मिश्र (अणु) सहित आगरा, किरावली, मैनपुरी, पीलीभीत, बदायूं, चंदौसी, विसौली, दरुआपुर, आवला आदि स्थानों से आए हजारों श्रद्धालु सम्मिलित हुए।
रमा एकादशी के इस पावन अवसर पर शूकरक्षेत्र धाम सोरों जी में भक्ति, सेवा और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को दिव्य आध्यात्मिक माहौल से सराबोर कर दिया।
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Author: Soron Live 24

