पालतू गाय-भैंस की अस्थियों का हरि की पैड़ी सोरों में विसर्जन, रतलाम दंपत्ति ने जताई पशु प्रेम की अनोखी मिसाल


सनातन परंपरा में श्रद्धा, संवेदना और कृतज्ञता का दुर्लभ संगम सोरों शूकर क्षेत्र में
कासगंज। (सचिन उपाध्याय)तीर्थनगरी सोरों शूकरक्षेत्र स्थित हरि की पैड़ी कुंड में मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के ग्राम अरनिया माताजी, तहसील आलोठ निवासी श्रद्धालु रमेश चंद्र चंद्रवंशी अपनी पत्नी के साथ पहुंचे। उन्होंने अपनी पालतू गाय और भैंस की अस्थियों का गंगा जल में विधि-विधान से विसर्जन किया।
श्रद्धालु रमेश चंद्र ने बताया कि वर्षों तक उन्होंने इन गाय-भैंसों का पालन-पोषण किया। उनके परिवार का भरण-पोषण उन्हीं के दूध से हुआ। जब इनका देहांत हुआ, तो उन्होंने मां की तरह उनका संस्कार किया और गांव में तेरहवीं संस्कार भोज भी कराया। इसके उपरांत अस्थियां लेकर वे तीर्थनगरी सोरों पहुंचे, जहां गंगा गुरु उमेश पाठक ने पिंडदान एवं अस्थि विसर्जन की विधि संपन्न कराई।
गंगा गुरु उमेश पाठक ने कहा कि यह कार्य सनातन धर्म में निहित उस भावना को दर्शाता है, जिसमें हर जीव-जंतु के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। उन्होंने कहा —
“जिस प्रकार परिवार के सदस्य के निधन पर संस्कार किए जाते हैं, उसी प्रकार पशुओं के प्रति भी श्रद्धा रखना सनातन संस्कृति का सच्चा रूप है। रतलाम से आए यजमान ने यह उदाहरण प्रस्तुत किया है कि पशु भी हमारे परिवार का अभिन्न अंग हैं।”
यह अनोखी घटना न केवल पशु प्रेम का प्रतीक बनी, बल्कि यह भी संदेश देती है कि सनातन परंपरा केवल मनुष्य तक सीमित नहीं, बल्कि हर उस जीव तक फैली है जो मानव जीवन के पोषण और सेवा में सहभागी होता है।
Author: Soron Live 24

