कासगंज:30 अप्रैल को होगा भगवान परशुराम जन्मोत्सव का भव्य आयोजन ब्राह्मण कल्याण सभा की बैठक संपन्न।पराक्रम के कारक एवं सत्य के धारक तथा शस्त्र व शास्त्र के धनी, अष्टचिरंजीवी, भगवान विष्णु के आवेशावतार भगवान परशुराम प्रकटोत्सव पर होने वाले कार्यक्रमों के संदर्भ में ब्राह्मण कल्याण सभा की बैठक बृजरानी गेस्ट हाउस निकट हर की पौड़ी पर संपन्न हुई बैठक की अध्यक्षता सभा के संस्थापक अध्यक्ष शरद कुमार पांडे ने की तथा संचालन संगठन मंत्री हरिओम पचौरी ने किया | संस्थापक अध्यक्ष शरद कुमार पांडे ने कहा – भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं। उनका जन्म ऋषि जमदग्नि और रेणुका के घर हुआ था। भगवान परशुराम ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए कार्तवीर्य अर्जुन का वध किया था और उसके बाद उन्होंने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रियों से मुक्त किया था। भगवान परशुराम जन्मोत्सव ब्राह्मण के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार भगवान परशुराम की वीरता और उनके द्वारा किए गए कार्यों को याद दिलाता है। यह त्योहार ब्राह्मण समाज की एकता और संगठितता को भी दर्शाता है। शरद पांडे ने भगवान परशुराम जी के बारे में बताते हुए कहा – भगवान परशुराम मृत्यु से मुक्त हैं। वह उन 7 चिरंजीवी में से हैं, जिन्हें हमेशा के लिए अमर माना जाता है। परशुराम जी सदैव अपने गुरुजनों तथा माता-पिता की आज्ञा का पालन करते थे। भगवान परशुराम जी ने पितृभक्ति के फलस्वरूप अष्ट-चिरंजीवियों में स्थान प्राप्त किया अर्थात वे आज भी जीवित हैं।असल में परशुराम जी को भगवान विष्णु का उग्र अवतार माना गया है। ऐसे में यह माना जाता है कि यदि उनकी पूजा की जाए, तो इससे साधक को बहुत अधिक ऊर्जा प्राप्त होगी। इस ऊर्जा को एक सामान्य व्यक्ति के लिए ग्रहण करना और उसे नियंत्रित करना काफी कठिन है। यही कारण है कि भगवान परशुराम जी की पूजा नहीं की जाती। जन्मोत्सव मनाया जाता है
भगवान परशुराम को दशावतार से संबंधित भगवान विष्णु के छठे अवतार के रूप में जाना जाता है। परशुराम उस युग के सबसे क्रोधी ब्राह्मण या साधु माने जाते हैं । पौराणिक संदर्भों के अनुसार परशुराम भृगु वंश में जन्मे थे। भृगु के पुत्र च्यवन हुए, च्यवन के ऋचीक, ऋचीक के जमदग्नि और जमदग्नि के पुत्र परशुराम। इस तरह उनकी पितृ परम्परा परम् यशस्वी है। ऋचीक का विवाह प्रख्यात ऋषि विश्वामित्र की बहन सत्यवती से हुआ था।
इस बार भगवान परशुराम का जन्मोत्सव अक्षय तृतीया रविवार, 30 अप्रैल, 2025 को मनाया जाएगा। अक्षय तृतीया, जिसे आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है, एक शुभ हिंदू त्योहार है जो हर साल भारतीय महीने वैशाख के शुक्ल पक्ष के तीसरे चंद्र दिवस पर मनाया जाता है। इसका गहरा आध्यात्मिक महत्व है और माना जाता है कि इसे करने वालों को सौभाग्य, समृद्धि और प्रचुरता मिलती है।
परशुराम ने अपने स्थायी निवास के लिए इस भूमि से महेंद्रगिरि शिखर (परशुराम नाम के गांव में) को चुना। यहीं पर मंदिर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि भगवान परशुराम सूर्योदय के समय हिमालय के लिए प्रस्थान करते हैं, हिमालय में तपस्या करते हैं और सूर्यास्त के समय मंदिर में वापस लौटते हैं।
शरद पांडे ने कहा – ब्राह्मण समाज को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं उन सभी विप्र बांधों को सामाजिक एकता, ब्राह्मण एकता से समाज में एकता और अपनत्व को बढ़ावा मिलता है। उसके साथ ही ब्राह्मण एकता से हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलती है। तथा ब्राह्मण एकता से राजनीतिक क्षेत्र में भी हमारी आवाज को मजबूती मिलती है।
बैठक को संबोधित करते हुए सचिव जयप्रकाश त्रिवेदी ने बताया – भगवान परशुराम जन्मोत्सव दिनांक 30 अप्रैल 2025 दिन रविवार अक्षय तृतीया को भगवान परशुराम मंदिर हर की पौड़ी पश्चिमी तट पर भव्यता के साथ मनाया जाएगा सचिव जयप्रकाश त्रिवेदी ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया – भगवान परशुराम जन्मोत्सव के आयोजन में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिनमें प्रातः भगवान परशुराम का अभिषेक हवन पूजा और आरती भजन और कीर्तन अन्नदान और दान कर भगवान परशुराम जी की शोभायात्रा नगर में भ्रमण करेगी
संगठन मंत्री हरिओम पचौरी ने विचार व्यक्त करते हुए कहा – यह त्योहार हमें भगवान परशुराम की वीरता और उनके द्वारा किए गए कार्यों को याद दिलाता है। यह त्योहार हमें ब्राह्मण समुदाय की एकता और संगठितता को भी दर्शाता है। हरिओम पचौरी ने कहा – अक्षय तृतीया पर, हर की पौड़ी श्री गंगा जी सूकर क्षेत्र सोरों तथा नदियों या पवित्र जल में स्नान करना, देवताओं की पूजा करना, दान करना और विवाह, गृह प्रवेश और व्यवसाय उद्घाटन जैसे शुभ समारोह आयोजित करना अलग-अलग तरह से आयोजित किया जाता है। इसे नए उद्यम और निवेश के लिए शुरू करना भी एक उपयुक्त समय माना जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे फलदायक परिणाम मिलते हैं। अक्षय तृतीया पर अन्न दान का महत्व से एक दान का कार्य है, विशेष रूप से भोजन दान (अन्नदान)। भोजन देना एक पुण्य कार्य माना जाता है जिसे केवल भूख कम करने में मदद मिलती है बल्कि हिंदू शास्त्रों के अनुसार अपार आशीर्वाद और पुण्य भी शामिल होता है। ऐसा माना जाता है कि इस शुभ दिन पर भोजन करने वाले व्यक्ति को हमेशा समृद्धि और ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है।
नगर अध्यक्ष धनदीप दघिर्रा (लालू) बताते हुए कहा – अक्षय तृतीया के दिन प्लास्टिक की चीजें, स्टील एल्युमिनियम के बर्तन, काले कपड़े, काटेंदार वस्तुएं, कालें रंग की वस्तुएं, भूलकर भी नहीं खरीदना चाहिए। कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन ये चीजें खरीदने से घर में दरिद्रता आती है। बैठक को संबोधित करते हुए ब्राह्मण कल्याण सभा सदस्य पंडित सुरेंद्र महेरे ने कहा – भगवान परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर सभी विप्र बंधुओं को कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया जाता है! आइए हम भगवान परशुराम की वीरता और उनके द्वारा किए गए कार्यों को याद करें और उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारें।
आइए हम एक साथ मिलकर भगवान परशुराम की महिमा को बढ़ाएं और उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारें।
बैठक में मुख्य रूप से सुरेंद्र महेरे, विनोद दीक्षित, शशांक दीक्षित, प्रदीप उपाध्याय, विजय कटारा, गिरजा शंकर पाठक ,दीपक बोहरे, नगर अध्यक्ष धनदीप दघिर्रा (लालू),नगर महासचिव अर्जुन मिश्रा, सोमदत्त पाठक, हरिओम पचौरी, योगेश उपाध्याय, जयप्रकाश त्रिवेदी, पंकज पाठक, सीटू पाठक, श्याम दीक्षित, दिलीप शर्मा, आकाश दुबे, जिला अध्यक्ष पवन वशिष्ठ, जिला उपाध्यक्ष अतुल निर्भय, जिला उपाध्यक्ष मनोज पुरबिया, जिला संगठन मंत्री गंगा विष्णु माफीदार, जय किशन मिश्रा, ब्राह्मण कल्याण सभा युवा नगर अध्यक्ष सरस दुबे सहित अनेक सदस्य पदाधिकारी उपस्थित रहे |

Author: Soron Live 24



