बाल परियोजना विभाग में भ्रष्टाचार बना शिष्टाचार ?
जनपद में आंगनवाडी भर्ती चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट
कासगंज। जनपद कासगंज में भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन चुका है। वैसे तो शासन का कोई भी विभाग इससे अछूता नहीं हैं, लेकिन बाल विकास परियोजना विभाग इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। जहां योग्यता को दरकिनार कर अपने-अपने चहेतों को रेबड़ियां वांटी जा रही है। लाख शिकायतों के बावजूद भी इस भ्रष्ट व्यवस्था में बदलाव नजर नहीं आ रहा। इस प्रकार ये भ्रट तंत्र शासन की छवि को भी धूमिल कर रहे है। इसके साथ ही यह भ्रष्ट तंत्र न्यायालय की भी अनदेखी कर रहे है।
यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि भारत एक ऐसा देश है जहां सरकारी कर्मचारी बिना काम का वेतन लेते है और काम करने के लिए सुविधा शुल्क। यह चर्चा अव पूरी तरह से आम हो चुकी है। समय-समय पर इसके प्रमाण भी अखबारों की सुर्खियां बनते है। वर्तमान में बाल विकास परियोजना विभाग इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। प्राप्त विवरण के अनुसार विकास खण्ड कासगंज की ग्राम पंचायत इखौना, विकास खण्ड पटियाली की ग्राम पंचायत लाधौली एवं विकास खण्ड सोरों की ग्राम पंचायत मिर्जापुर और ग्राम पंचायत कादरबाड़ी तथा ग्राम पंचायत तोलकपुर में एक-एक पद आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के रिक्त थे। जिसकी चयन प्रक्रिया वर्तमान प्रभारी डीपीओ सुशीला यादव द्वारा प्रारम्भ की गई। चयन प्रक्रिया के प्रारम्भ होते ही प्रभारी डीपीओ सुशीला यादव विवादित भी हो गई। चयन प्रक्रिया में जहां एक ओर मानकों की अनदेखी की गई तो कुछ आवेदको ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चयन प्रक्रिया पूर्ण करने का आरोप भी लगाया। शिकायतकर्ता आवेदको ने आरोप लगाते हुए कहा कि इस चयन प्रक्रिया में भ्रटाचार किया जा रहा है। कुछ आवेदको ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संजय यादव प्रभारी डीपीओ सुशीला यादव का चहेता बना हुआ है। जिसका मुख्य कारण दोनों का सजातीय होना भी है। जन चर्चाओं में यह भी कहा गया है कि जनपद में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र भ्रटाचार का मुख्य केन्द्र बने हुए हुए है। जहां बच्चों को एवं गर्भवती महिलाओं को मिलने वाला पुष्टाहार खुले बाजार में ब्लैक में बेचा जा रहा है। जिससे ग्रामीण अंचलों के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को शासन की इस जनकल्याणकारी योजना का लाभ नही मिल पा रहा है। जानकारों को यह भी मानना है कि इस चयन प्रक्रिया को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक रिट याचिका को स्वीकार किया है। जिसमें उच्च न्यायालय ने प्रदेश शासन से 26 मार्च तक जबाव मांगा है। जिसकी सुनवाई होना वाकी है। इसके बावजूद भी प्रभारी डीपीओ सुशीला यादव द्वारा चयन प्रक्रिया को पूर्ण करना न्यायालय के दिशा निर्देशों की सीधे-सीधे अवहेलना है। यदपि शासन की जीरो टाॅरलेंस की नीति धूलसित होती दिखाई दे रही है। भ्रष्ट तंत्र की इसी भ्रष्ट कार्यशैली के चलते आमजनता यह कहने को विवश हो रही है कि भारत एक एसा देश है जहां कर्मचारी बिना काम का वेतन लेते है और काम करने के लिए सुविधा शुल्क।
डीएम ने तहसील दिवस में लगाई थी डीपीओ को लताड़, दी चेतावनी
कासगंज। जनपद की प्रभारी डीपीओ सुशीला यादव की पक्षपात पूर्ण एवं भ्रष्ट कार्यशैली से जिला प्रशासन के आलाधिकारी भी परिचित है। प्रभारी डीपीओ सुशीला यादव की भ्रष्ट कार्यशैली को लेकर जिलाधिकारी मेधा रूपम ने बीते दिनों तहसील पटियाली में सम्पन्न हुए तहसील दिवस के दौरान प्रभारी डीपीओ को लताड़ भी लगाई और उन्हे सुधरने की चेतावनी दी। साथ ही उन्हे पारदर्शी, निष्पक्ष व्यवस्था अपना कर नियमानुसार कार्य करने का निर्देश भी जारी किया। लेकिन इसके बावजूद भी प्रभारी डीपीओ अपने आप में बदलाव नहीं ला पा रही है। यह सीधे-सीधे जिलाधिकारी के दिशानिर्देशों की अवहेलना है।
फोटो कैप्शन- शिकायती पत्र का फाइल फोटो।

——————-

Author: Soron Live 24



