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पीएम मोदी ने संगम में लगाई आस्था की डुबकी

पीएम  मोदी ने संगम में लगाई आस्था की डुबकी

प्रयागराज।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बुधवार दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुंभ में पहुंचे हैं।आज माघ महीने की अष्टमी तिथि पर पुण्य काल में पवित्र त्रिवेणी में पीएम ने भगवा रंग का वस्त्र पहन कर संगम में आस्था की डुबकी लगाई।पीएम ने गंगा को प्रणाम करते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य दिया।संगम तट पर ही गंगा की पूजा कर देशवासियों की कुशलता की कामना की।

पीएम मोदी प्रयागराज एयरपोर्ट पर उतरे फिर वहां से हेलीकॉप्टर से डीपीएस स्कूल के ग्राउंड पहुंचे।इसके बाद अरैल घाट से नाव से पीएम संगम नोज पर पहुंचे।सीएम योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मौजूद रहे।बता दें कि इससे पहले पीएम मोदी ने बीते 13 दिसंबर को संगम नगरी आए थे। पीएम ने दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुंभ के पहले संगम तट पर गंगा की आरती और पूजा कर इस महाआयोजन के सकुशल संपन्न होने की मंगलकामना की थी। पीएम ने 5,500 करोड़ रुपये की 167 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया था।महाकुंभ शुरू होने के बाद पीएम का ये पहला प्रयागराज दौरा है।

पीएम आज सुबह लगभग 10 बजकर 5 मिनट पर बमरोली एयरपोर्ट पहुंचे। यहां से हेलीकॉप्टर से ही अरैल स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल के हेलीपैड पर उतरे।इसके बाद यहां से जल मार्ग से संगम पर पहुंचे।पीएम ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई।बता दें कि पीएम मोदी का महाकुंभ में रुकने का करीब 2 घंटे का कार्यक्रम था।सुबह 11 बजे से साढ़े ग्यारह बजे तक का समय पीएम मोदी के लिए आरक्षित था,लेकिन अब बदलाव हुआ है।अब पीएम महाकुंभ में एक ही घंटा रहेंगे।पहले से तय कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

महाकुंभ में पीएम मोदी के दौरे को लेकर विशेष तैयारियां कल से ही शुरू हो गई थी।संगम घाट से लेकर प्रयागराज की सड़कों पर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल लागू है।पीएम मोदी के संगम नगरी दौरे को देखते हुए पूरे प्रयागराज और महाकुंभ में सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया गया हैं।डॉग स्क्वायड और एंटी सेबोटाज टीमों ने सभी प्रमुख जगहों पर पहुंचकर चप्पे-चप्पे की तलाशी ली।एटीएस और एनएसजी के साथ सुरक्षा में लगीं अन्य टीमें भी अलर्ट हैं।संगम क्षेत्र में पैरामिलिट्री फोर्स भी तैनात है।

पीएम मोदी आज माघ महीने की अष्टमी तिथि पर पुण्य काल में पवित्र त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई। हिंदू पंचांग की मानें तो 5 फरवरी माघ मास की गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन तप, ध्यान और साधना को बेहद फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन जो लोग तप, ध्यान और स्नान करते हैं उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। इसके अलावा इस दिन को भीष्माष्टमी के रूप में भी जाना जाता है।धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक महाभारत के दौरान भीष्म पितामह को बाणों की शय्या पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने और शुक्ल पक्ष की प्रतीक्षा की थी। माघ मास की अष्टमी तिथि पर उन्होंने श्रीकृष्ण की उपस्थिति में अपने प्राण त्यागे, जिसके बाद उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।

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Author: Soron Live 24

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